‘4 महीने में तय करें किसका है तृणमूल और सिंबल’: SC ने चुनाव आयोग को दी डेडलाइन, ममता बनर्जी की याचिका पर बड़ा आदेश

नई दिल्ली। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न ‘फूल और घास’ को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बेहद अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने मामले के जल्द निपटारे के लिए भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के लिए एक सख्त समय-सीमा तय कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि चुनाव आयोग को अधिकतम चार महीने के भीतर इस पूरे विवाद की सुनवाई पूरी कर अंतिम फैसला सुनाना होगा।

4 हफ्ते में पूरी होगी दलीलों की प्रक्रिया, फिर आयोग लेगा फैसला

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पूरी प्रक्रिया की समय-सीमा निर्धारित की है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया है कि वे चार हफ्तों के भीतर अपने-अपने एफिडेविट और काउंटर-एफिडेविट चुनाव आयोग के समक्ष दाखिल करें।

दोनों पक्षों की ओर से दलीलें और जवाब पूरी होने के बाद निर्वाचन आयोग को मामले पर विस्तृत सुनवाई कर अंतिम निर्णय लेने के लिए तीन महीने का समय मिलेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि पूरी विधिक प्रक्रिया किसी भी हाल में अधिकतम चार महीने के भीतर पूरी हो जानी चाहिए।

ममता बनर्जी बनाम ऋतब्रत बनर्जी गुट में छिड़ी है जंग

यह पूरा कानूनी विवाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के गुटों के बीच पार्टी के अधिकार को लेकर है। दोनों ही पक्ष पार्टी के मूल नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और अधिकृत चुनाव चिह्न ‘फूल और घास’ पर अपना दावा ठोक रहे हैं। विवाद गहराने के बाद चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए दोनों ही गुटों द्वारा तृणमूल के नाम और चुनाव चिह्न के उपयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया था कि इस मामले का अंतिम समाधान चुनाव चिह्न आदेश, 1968 के पैरा 15 के प्रावधानों के तहत किया जाएगा।

अंतरिम आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं ममता बनर्जी

चुनाव आयोग द्वारा नाम और सिंबल के इस्तेमाल पर रोक लगाए जाने के अंतरिम फैसले को ममता बनर्जी ने शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। याचिका में दलील दी गई थी कि पार्टी की पहचान और सिंबल को इस तरह फ्रीज किए जाने से राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग की अंतरिम रोक पर तत्काल हस्तक्षेप करने के बजाय निर्वाचन आयोग को निश्चित समय-सीमा में मामले का पूर्ण समाधान करने का आदेश देकर मामले को जल्द से जल्द सुलझाने का रास्ता साफ कर दिया है।

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