छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर सख्त कानून: अवैध रूपांतरण पर उम्रकैद, मदद करने वालों पर भी होगी जेल,25 लाख जुर्माना
धर्मांतरण
छत्तीसगढ़ विधानसभा ने धर्मांतरण से जुड़े मामलों पर बड़ा और सख्त फैसला लेते हुए धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से पारित कर दिया है। इस नए कानून के लागू होने के बाद राज्य में बल, दबाव, प्रलोभन, धोखाधड़ी, झूठी जानकारी या कपटपूर्ण तरीकों से कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने साफ किया है कि पुराने कानून को बदलकर नया विधेयक इसलिए लाया गया, क्योंकि वर्ष 1968 का प्रावधान मौजूदा समय, तकनीक और बदलते सामाजिक परिदृश्य के लिहाज से पर्याप्त नहीं माना जा रहा था।
गृह मंत्री विजय शर्मा ने सदन में यह विधेयक पेश किया। बिल पास होने के बाद सत्ता पक्ष के विधायकों ने सदन में जय श्री राम के नारे लगाए, जबकि विपक्ष ने इसका विरोध करते हुए वॉकआउट किया। विपक्ष का कहना था कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर अंतिम निर्णय लेने से पहले सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, कानूनी विशेषज्ञों और सभी दलों के विधायकों से व्यापक राय ली जानी चाहिए थी।
पुराने कानून की जगह लाए गए नए और कड़े प्रावधान
राज्य सरकार का कहना है कि यह विधेयक केवल स्वेच्छा से धर्म मानने की स्वतंत्रता पर नहीं, बल्कि बल, लालच, दबाव या धोखे से कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। सरकार के मुताबिक, नए बिल को अंतिम रूप देने से पहले 50 से अधिक बैठकों में इसके विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। नया कानून वर्ष 1968 के पुराने धर्म स्वातंत्र्य कानून की जगह लेगा। इसमें केवल पारंपरिक तरीकों से ही नहीं, बल्कि डिजिटल माध्यम, सामूहिक गतिविधियों और संगठित प्रयासों के जरिए होने वाले धर्मांतरण को भी परिभाषित किया गया है, ताकि बदलते दौर में कानूनी कार्रवाई अधिक प्रभावी हो सके।
अवैध धर्मांतरण पर 7 से 10 साल जेल और 5 लाख तक जुर्माना
विधेयक के तहत यदि कोई व्यक्ति बल, प्रलोभन, दबाव, झूठी जानकारी या कपट के आधार पर किसी का धर्म परिवर्तन कराता है, तो उसे 7 साल से 10 साल तक की सजा दी जा सकेगी। इसके साथ ही उस पर कम से कम 5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया जाएगा। सरकार ने इस प्रावधान को नए कानून का आधार बताया है, ताकि किसी भी प्रकार के जबरन या फर्जी तरीके से कराए जाने वाले धर्मांतरण को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा जा सके।
महिला, नाबालिग, SC-ST और OBC पीड़ित होने पर सजा और कड़ी
विधेयक में संवेदनशील वर्गों से जुड़े मामलों के लिए और भी सख्त प्रावधान किए गए हैं। यदि अवैध धर्मांतरण का शिकार नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग का व्यक्ति होता है, तो आरोपी को 10 से 20 साल तक की जेल हो सकती है। ऐसे मामलों में न्यूनतम 10 लाख रुपए जुर्माना भी अनिवार्य किया गया है। सरकार का तर्क है कि कमजोर और संवेदनशील वर्गों को विशेष सुरक्षा देने के लिए यह व्यवस्था जरूरी है।
सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में उम्रकैद तक सजा
विधेयक में सामूहिक धर्मांतरण को सबसे गंभीर अपराधों में शामिल किया गया है। यदि किसी मामले में एक साथ कई लोगों का अवैध धर्मांतरण कराया जाता है, तो दोषी को 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकेगी। ऐसे मामलों में कम से कम 25 लाख रुपए जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है। सरकार ने संकेत दिया है कि संगठित रूप से धर्मांतरण कराने वाले नेटवर्क और संस्थाओं पर इसी प्रावधान के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
दोबारा दोषी पाए जाने पर सीधे आजीवन कारावास
नए विधेयक का सबसे कड़ा प्रावधान उन लोगों के लिए है, जो पहले भी अवैध धर्मांतरण के मामले में दोषी पाए जा चुके हैं। यदि कोई व्यक्ति एक बार ऐसे अपराध में सजा काटने के बाद फिर किसी अवैध धर्मांतरण प्रकरण में दोषी पाया जाता है, तो उसे आजीवन कारावास की सजा दी जा सकेगी। हालांकि विधेयक में यह भी व्यवस्था रखी गई है कि न्यायालय पर्याप्त या विशेष कारण होने पर कारावास की अवधि में कमी कर सकता है। बावजूद इसके, यह प्रावधान इस कानून को बेहद सख्त बनाता है।
मदद करने वालों पर भी होगी कार्रवाई
सिर्फ मुख्य आरोपी ही नहीं, बल्कि अवैध धर्मांतरण की प्रक्रिया में सहयोग करने वाले लोगों को भी कानून के दायरे में लाया गया है। विधेयक के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति इस प्रक्रिया में मददगार की भूमिका निभाता है, तो उसे कम से कम 6 महीने से लेकर 3 साल तक की सजा दी जा सकती है। इसके साथ ही उस पर 2 लाख रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा। यानी आयोजक, सहयोगी, संपर्ककर्ता या प्रक्रिया को आसान बनाने वाले अन्य व्यक्ति भी सीधे कानूनी कार्रवाई का सामना करेंगे।
स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन के लिए 60 दिन पहले देनी होगी सूचना
विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को आवेदन देना होगा। यही नियम उस धार्मिक अनुष्ठान को संपन्न कराने वाले पादरी, मौलवी, पुजारी या अन्य धार्मिक प्रतिनिधि पर भी लागू होगा। उन्हें भी धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया से दो महीने पहले प्रशासन को सूचना देनी होगी। यदि यह सूचना दिए बिना धर्मांतरण कराया गया, तो उसे अवैध माना जाएगा और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जा सकेगी।
प्रस्तावित धर्म परिवर्तन की जानकारी होगी सार्वजनिक
विधेयक में पारदर्शिता के नाम पर एक और महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई है। धर्म परिवर्तन के प्रस्ताव की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा। इस प्रावधान का मकसद यह बताया गया है कि यदि किसी मामले में दबाव, धोखाधड़ी या प्रलोभन जैसी आशंका हो, तो समय रहते प्रशासन को इसकी जानकारी मिल सके। हालांकि यह प्रावधान आने वाले समय में बहस का
