राज्योत्सव में पसरा सन्नाटा: मुख्य अतिथि नहीं पहुंचीं, खाली कुर्सियों ने बताया आयोजन की हकीकत

छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में आयोजित जिला स्तरीय राज्योत्सव का रंगारंग आगाज पूरी तरह फीका और निराशाजनक रहा। जिस कार्यक्रम को नए जिले की अस्मिता और गौरव का प्रतीक बनना था, वह प्रशासन की लापरवाही और प्रचार-प्रसार की कमी की वजह से उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका।

मुख्य अतिथि रेणुका सिंह की गैरहाज़िरी से छाया सन्नाटा

राज्योत्सव के लिए जारी सूची में मुख्य अतिथि के रूप में भरतपुर-सोनहत विधायक रेणुका सिंह का नाम था, लेकिन वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुईं। उनकी अनुपस्थिति ने न सिर्फ आयोजन के माहौल को ठंडा कर दिया, बल्कि प्रशासनिक समन्वय पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। स्थानीय मैदान में लगाई गई अधिकांश कुर्सियां खाली रहीं, और आम जनता के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों के लिए आरक्षित सीटें भी भरी नहीं जा सकीं।

प्रचार-प्रसार की कमी बनी आयोजन की सबसे बड़ी विफलता

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन ने कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार पर कोई ध्यान नहीं दिया। लोगों को राज्योत्सव के आयोजन की जानकारी तक नहीं मिली, जिसके कारण आमजन की भागीदारी बेहद कम रही। नए जिले में इस तरह के आयोजन का फीका रह जाना न केवल प्रशासनिक तैयारी पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सिर्फ बजट या औपचारिकता नहीं, बल्कि जनता की भागीदारी और सक्रियता ही किसी सरकारी कार्यक्रम की सफलता की कुंजी है।

खाली कुर्सियां बनी प्रशासनिक उदासीनता की मिसाल

जिला मुख्यालय मनेंद्रगढ़ के स्कूल ग्राउंड में खाली कुर्सियों का दृश्य और मुख्य अतिथि की अनुपस्थिति ने पूरे कार्यक्रम की चमक फीकी कर दी। आयोजन में जनउपस्थिति न होना यह बताता है कि स्थानीय प्रशासन ने योजना और समन्वय पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। यह अनुभव भविष्य के आयोजनों के लिए एक सबक है कि सरकारी कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए

 

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