कोरबा: SECL खदानों में भूविस्थापितों का विरोध प्रदर्शन, कोयला परिवहन ठप
कोरबा जिले की बड़ी कोयला खदानों – कुसमुंडा, गेवरा-दीपका और कोरबा क्षेत्र – से प्रभावित भूविस्थापित ग्रामीणों ने सोमवार सुबह से जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। छत्तीसगढ़ किसान सभा और भूविस्थापित रोजगार एकता संघ के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में कुसमुंडा खदान गेट पर एकत्र हुए और सुबह 6:00 बजे से कोयला परिवहन को पूरी तरह से रोक दिया गया।
रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास की मांग को लेकर सड़क पर उतरे ग्रामीण, SECL प्रबंधन से वार्ता जारी
कोरबा। कोरबा जिले की बड़ी कोयला खदानों – कुसमुंडा, गेवरा-दीपका और कोरबा क्षेत्र – से प्रभावित भूविस्थापित ग्रामीणों ने सोमवार सुबह से जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। छत्तीसगढ़ किसान सभा और भूविस्थापित रोजगार एकता संघ के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में कुसमुंडा खदान गेट पर एकत्र हुए और सुबह 6:00 बजे से कोयला परिवहन को पूरी तरह से रोक दिया गया।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने अपनी मांगों को स्पष्ट रूप से सामने रखा है, जिनमें शामिल हैं:
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वर्षों से लंबित रोजगार मामलों का त्वरित समाधान
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खमरिया गांव की अधिग्रहित जमीन किसानों को वापस लौटाना
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आउटसोर्सिंग कार्यों में स्थानीय विस्थापितों को प्राथमिकता से रोजगार देना
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मुआवजा वितरण में नाम और दस्तावेजों के आधार पर की जा रही कटौती बंद करना
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सभी प्रभावित परिवारों को पुनर्वास में जगह देना
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बसाहट वाले क्षेत्रों में बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना
क्या है आंदोलन की पृष्ठभूमि?
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि SECL प्रबंधन द्वारा वर्षों पहले ग्रामीणों की जमीनें अधिग्रहित की गईं, लेकिन अब तक बड़ी संख्या में पात्र भूविस्थापितों को रोजगार से वंचित रखा गया है।
हालांकि बीच-बीच में कुछ लोगों को नौकरी दी गई है, लेकिन अब भी कई परिवार ऐसे हैं जो अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
प्रशासन और पुलिस मौके पर मौजूद
प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही SECL के वरिष्ठ अधिकारी, सुरक्षा कर्मी और स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण वार्ता की जा रही है, ताकि कोयला परिवहन दोबारा शुरू किया जा सके।
खदान संचालन पर असर
कोयला खदानों से सप्लाई बंद होने का सीधा असर उद्योगों और पावर प्लांट्स की सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। अगर प्रदर्शन लंबा खिंचता है, तो इससे कोल इंडिया और SECL के उत्पादन लक्ष्यों पर भी असर पड़ना तय है।
