“मनरेगा बचाओ संग्राम”: नाम परिवर्तन के विरोध में कांग्रेस की पदयात्रा, दीपक बैज बोले- ग्रामीणों के रोज़गार से हो रहा खिलवाड़
जगदलपुर। मनरेगा योजना के नाम परिवर्तन को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब ग्रामीण रोज़गार और आर्थिक सुरक्षा के मुद्दे के रूप में उभरता जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस ने इसे गंभीर जनहित का विषय बताते हुए “मनरेगा बचाओ संग्राम” नाम से जनसंपर्क अभियान की शुरुआत की है, जो अब पंचायत स्तर तक पहुँचाया जा रहा है।
इसी कड़ी में चित्रकोट विधानसभा क्षेत्र में ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित करने के लिए कांग्रेस ने जनसंपर्क पदयात्रा निकाली। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में यह पदयात्रा टांडपाल से सिरीसगुड़ा तक लगभग आठ किलोमीटर लंबी रही। बड़ी संख्या में ग्रामीण इस पदयात्रा में शामिल हुए और अपने रोज़गार व मजदूरी से जुड़े अनुभव साझा किए।
पदयात्रा के दौरान कांग्रेस नेताओं ने घर-घर जाकर ग्रामीणों से चर्चा की। ग्रामीणों को बताया गया कि यूपीए सरकार के समय मनरेगा के तहत ग्रामीण मजदूरों को 100 दिन का कानूनी रोज़गार सुनिश्चित था, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में औसतन साल भर में केवल 38 दिन का काम मिल पा रहा है। दीपक बैज ने आरोप लगाया कि योजना के मूल प्रावधानों को कमजोर किया गया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा नकारात्मक असर पड़ा है।
इस पदयात्रा में चित्रकोट के पूर्व विधायक राजमन बेंजान, जगदलपुर के पूर्व विधायक रेखचंद जैन, नारायणपुर के पूर्व विधायक चंदन कश्यप सहित कांग्रेस के कई स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। नेताओं ने ग्रामीणों को मनरेगा योजना के महत्व और उससे जुड़े अधिकारों के प्रति जागरूक किया।
ग्रामीणों ने बातचीत के दौरान मनरेगा में काम के घटते दिनों, मजदूरी की कमी, नियमों में बदलाव और रोजगार की असमान उपलब्धता जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले फैसलों के खिलाफ जनआंदोलन है।
प्रदेश भर की पंचायतों तक पहुंचेगा अभियान
प्रदेश कांग्रेस ने घोषणा की है कि “मनरेगा बचाओ संग्राम” अभियान को आने वाले महीनों में राज्य की सभी पंचायतों तक ले जाया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को योजना में हुए बदलावों की जानकारी देना, उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना और रोजगार के अधिकार के लिए उन्हें संगठित करना है।
दीपक बैज ने कहा कि जब ग्रामीण अपने अधिकारों को समझेंगे, तभी वे मनरेगा से मिलने वाले लाभ की मांग मजबूती से कर सकेंगे। उन्होंने जोर दिया कि योजना के अधिकार कमजोर होने से सिर्फ मजदूर ही नहीं, बल्कि पूरा ग्रामीण समाज आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है।
