सप्लाई चेन के लिए भारत बन रहा पहली पसंद: न्यूयॉर्क में बोले एस. जयशंकर- ‘सेमीकंडक्टर और हाईटेक निर्माण में निवेश करेंगी जापानी कंपनियां’

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत और जापान के बीच तेजी से प्रगाढ़ होते कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंधों का खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रमुख जापानी बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब भारत में अपने परिचालन का विस्तार करने और नई इकाइयां स्थापित करने में अभूतपूर्व रुचि दिखा रही हैं। यह रुझान विशेष रूप से सेमीकंडक्टर चिप निर्माण, विशेष रसायन और अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में तेजी से उभर रहा है, जो ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों लोकतांत्रिक देश वैश्विक आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित बनाने के लिए आपसी साझेदारी को मजबूती दे रहे हैं।

द्विपक्षीय आर्थिक रिश्तों में व्यापार से अधिक निवेश पर जोर

विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत और जापान के आर्थिक संबंध पारंपरिक द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित रहने के बजाय दीर्घकालिक निवेश पर अधिक केंद्रित हो रहे हैं। वैश्विक भू-राजनीतिक बदलावों के बीच जापानी उद्योग जगत अब उत्पादन के लिए किसी एक देश पर निर्भर रहने के जोखिम को समझ चुका है और अपने आपूर्ति तंत्र में विविधता लाने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठा रहा है। इस संदर्भ में भारत एक सुरक्षित, विश्वसनीय और वैकल्पिक उत्पादन केंद्र के रूप में स्वाभाविक रूप से उभर रहा है, जिससे दोनों देशों के मध्य संस्थागत पूंजी निवेश में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है।

भारतीय प्रतिभा और स्थानीय कंपनियों के साथ साझेदारी की तलाश

सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र का विशेष उल्लेख करते हुए जयशंकर ने कहा कि जापानी कंपनियां केवल अपनी पूंजी लगाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे भारत के विशाल तकनीकी कौशल और कुशल कार्यबल के बेहतर उपयोग की दिशा में भी काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि जापानी कंपनियां भारतीय साझेदारों के साथ संयुक्त उपक्रम बनाकर स्थानीय प्रतिभा के दम पर वैश्विक आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने के ठोस प्रयास कर रही हैं, जिससे जमीनी स्तर पर कई नई औद्योगिक इकाइयां आकार ले रही हैं।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दो प्रमुख समुद्री शक्तियों का रक्षा समन्वय

सुरक्षा और रणनीतिक आयामों पर चर्चा करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और जापान दोनों ही प्रमुख समुद्री शक्तियां हैं, जिनके हित स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से अभिन्न रूप से जुड़े हुए हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत में दशकों से सभी राजनीतिक विचारधाराओं में जापान के प्रति गहरा सकारात्मक दृष्टिकोण रहा है। इस ऐतिहासिक विश्वास, अनुकूल भौगोलिक स्थिति और साझा रणनीतिक चुनौतियों ने दोनों देशों के रक्षा सहयोग को एक सुदृढ़ आधार प्रदान किया है।

बढ़ते संयुक्त सैन्य अभ्यास और क्वाड ढांचे की भूमिका

विदेश मंत्री ने दोनों देशों के बीच आयोजित होने वाले साझा रक्षा अभ्यासों का उल्लेख करते हुए जापानी वायुसेना के भारतीय वायुक्षेत्र में संपन्न हुए अभ्यास को रणनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि रक्षा व्यापार और तकनीक हस्तांतरण से जुड़े संबंध स्थापित करना जटिल प्रक्रिया होती है, लेकिन दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच बढ़ता तालमेल इस दिशा में मील का पत्थर है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका की सदस्यता वाला ‘क्वाड’ मंच दोनों देशों को इंडो-पैसिफिक में व्यवस्थित सहयोग के लिए एक ठोस बहुपक्षीय ढांचा उपलब्ध कराता है।

जन-जन का जुड़ाव: भारतीय छात्रों और भाषा अध्ययन पर बल

द्विपक्षीय संबंधों के मानवीय और सांस्कृतिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए जयशंकर ने कहा कि यह साझेदारी केवल सरकारों और कॉरपोरेट घरानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि उच्च शिक्षा और शोध के लिए अधिक से अधिक भारतीय विद्यार्थियों को जापान का रुख करना चाहिए, क्योंकि वर्तमान में वहां भारतीय छात्रों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। इसके समानांतर उन्होंने भारत में जापानी भाषा और संस्कृति सीखने के प्रति युवाओं में बढ़ती रुचि को जन-जन के संपर्क को प्रगाढ़ करने वाला सकारात्मक संकेत बताया।

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