जेलों में मौत, अपराध और नक्सल पुनर्वास पर हंगामा: भूपेश बघेल बनाम विजय शर्मा, विपक्ष का बहिर्गमन

छत्तीसगढ़ विधानसभा

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रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन प्रश्नकाल के दौरान जेलों में बंदियों की मौत, अपराध दर और नक्सल पुनर्वास नीति को लेकर सदन में तीखी बहस देखने को मिली। विपक्षी कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए, वहीं सत्ता पक्ष ने सभी आरोपों का खंडन किया।

जेलों में मौत का मुद्दा उठा, भूपेश बघेल ने सरकार को घेरा

प्रश्नकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ की जेलों में हो रही मौतों का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि जनवरी 2025 से जनवरी 2026 तक कितने बंदियों की मृत्यु हुई है। साथ ही उन्होंने जेलों में क्षमता से लगभग 150 प्रतिशत अधिक कैदियों के रखे जाने और हत्या, लूट व फिरौती जैसे अपराधों में 35 प्रतिशत वृद्धि का सवाल भी उठाया।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने दी आधिकारिक जानकारी

प्रश्नों का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि जनवरी 2025 से जनवरी 2026 तक प्रदेश की जेलों में कुल 66 बंदियों की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि इनमें से 18 मामलों में मजिस्ट्रेट जांच पूरी हो चुकी है, जबकि 48 मामलों में जांच प्रक्रियाधीन है।

जीवन ठाकुर मौत मामला बना बहस का केंद्र

भूपेश बघेल ने पंकज साहू और जीवन ठाकुर की मौत को लेकर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जीवन ठाकुर को फर्जी मामले में फंसाया गया, उनके बेटे को भी जेल भेजा गया और दोनों को अलग रखा गया। उन्होंने कहा कि जीवन ठाकुर को परिजनों से मिलने नहीं दिया गया, इलाज में लापरवाही हुई और डॉक्टर की सलाह के बावजूद अस्पताल में भर्ती नहीं कराया गया।

सरकार का पक्ष: इलाज में लापरवाही नहीं

विजय शर्मा ने जवाब में कहा कि जीवन ठाकुर का मामला प्रश्नकाल की अवधि के बाद का है, फिर भी वह सूची में शामिल है। उन्होंने कहा कि जीवन ठाकुर जेल में परहेज नहीं करते थे, जिससे उनका शुगर लेवल बढ़ता था। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि जेल अधीक्षक ने ये सभी तथ्य अदालत में रखे हैं। समय-समय पर डॉक्टर द्वारा परीक्षण किया गया, आवश्यक दवाइयां दी गईं और किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई।

विपक्ष का आरोप, सदन में हंगामा

भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि विधायकों को भी जीवन ठाकुर से मिलने नहीं दिया गया और यह मामला “सरकारी हत्या” का है। उन्होंने सदन की समिति से जांच की मांग की। जांच की मांग को लेकर विपक्षी विधायकों ने नारेबाजी की, जिससे सदन में हंगामा हुआ। जवाब से असंतुष्ट होकर कांग्रेस विधायकों ने बहिर्गमन किया।

नक्सल पुनर्वास नीति पर भी उठे सवाल

सत्र के चौथे दिन कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने नक्सल पुनर्वास नीति को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि 2023-24 से अब तक कितने इनामी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, कितनी इनामी राशि का भुगतान हुआ और पुनर्वास पर कितना खर्च किया गया।

1496 इनामी नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण: सरकार

गृह मंत्री विजय शर्मा ने जवाब में बताया कि पुनर्वास नीति 2023-24 से 9 फरवरी 2026 तक 1496 इनामी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने बताया कि घोषित इनामी राशि में से 4 करोड़ 25 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है और प्रत्येक को 5 लाख रुपये तक की राशि संलग्न कर दी गई है।

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