राजस्व निरीक्षक परीक्षा घोटाला: कुंजाम कमेटी की रिपोर्ट पर उठे सवाल, जांच प्रक्रिया में गंभीर खामियां
रायपुर। राजस्व निरीक्षक विभागीय परीक्षा में हुए घोटाले की जांच के लिए गठित के.डी. कुंजाम कमेटी की रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कमेटी ने दावा किया था कि 22 पारिवारिक सदस्यों को एक साथ बैठाकर परीक्षा दिलाई गई, लेकिन विधानसभा में दिए गए जवाब में सिर्फ 13 अभ्यर्थियों के रिश्तेदार होने की बात कही गई है। आरोप है कि कमेटी ने जल्दबाजी में रिपोर्ट तैयार कर दी और अभ्यर्थियों के अभ्यावेदनों पर विचार तक नहीं किया। चार अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जबकि विधानसभा में दावा किया गया कि सभी अभ्यावेदन निराकृत कर दिए गए हैं।
पड़ताल में खुलासा हुआ कि परीक्षा में 68 रिश्तेदार शामिल हुए थे, लेकिन सिर्फ 13 का चयन हुआ। कमेटी ने बिना ठोस जांच के सिर्फ अनुक्रमांक के आधार पर मान लिया कि अभ्यर्थी पास-पास बैठे थे। हालांकि, जितेंद्र ध्रुव और निमेश ध्रुव तथा जयप्रकाश जैन और तपेश जैन जैसे कुछ चयनित अभ्यर्थियों की बैठक व्यवस्था अलग-अलग थी। इसके अलावा, कमेटी ने तुकेश्वर भू आर्य और दरसबती भू आर्य को रिश्तेदार बताया, जबकि वे संबंधित नहीं थे।
जांच प्रक्रिया में लापरवाही
कमेटी ने विस्तृत जांच के बजाय विभागीय रिकॉर्ड को ही आधार बनाया। गृह विभाग से सहायता मांगी गई, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि पांच सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट पर सिर्फ चार सदस्यों ने ही हस्ताक्षर किए। एक सदस्य ने साइन करने से मना कर दिया, जिससे रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए।
अभ्यावेदनों की अनदेखी
कई अभ्यर्थियों ने रिपोर्ट के बाद अभ्यावेदन दिए, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अमित सिन्हा, दरसबती भू आर्य, तुकेश्वर भू आर्य, महेंद्र जैन, भूपेंद्र नवरंग, कविता कुमारी और बालाराम जैन जैसे अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि उनके परिवार का कोई सदस्य विभाग में कार्यरत नहीं है, फिर भी उन्हें पारिवारिक सदस्य बताया गया। चार अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जहां न्यायालय ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन करने का निर्देश दिया।
क्या कहते हैं चयनित अभ्यर्थी?
चयनित अभ्यर्थी अमित सिन्हा ने बताया कि 12-13 लोगों ने अभ्यावेदन दिए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा, “हम पर आरोप लगे, लेकिन हमारा पक्ष नहीं सुना गया। जिसने शिकायत की, उसने मेरा नाम बस्तर के रविंद्र कुमार से जोड़ा, जबकि हमारी जाति और क्षेत्र अलग हैं।”
अब तक की कार्रवाई
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पटवारी से राजस्व निरीक्षक पदोन्नति परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप लगा।
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राजस्व पटवारी संघ के अध्यक्ष भागवत कश्यप ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
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सरकार ने कुंजाम कमेटी गठित की, जिसने 22 अभ्यर्थियों को एक साथ बैठने और OMR शीट में गोपनीयता भंग होने की बात कही।
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ईओडब्ल्यू-एसीबी को जांच सौंपी गई, जो अभी भी चल रही है।
