धान खरीदी में अड़ंगा डालने की मिली सजा: रायपुर कलेक्टर ने 250 राशन दुकानों का आवंटन रद्द, 12 पर FIR

रायपुर। धान खरीदी में सहयोग न करने और किसानों को परेशान करने के आरोपों से तंग आ चुके रायपुर जिले के कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह ने रविवार को बड़ा ऐलान किया। जिले की 250 राशन दुकानों का आवंटन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है, जो अब तक सहकारी समितियों के पास थीं। इन दुकानों का संचालन अब संबंधित ग्राम पंचायतें करेंगी। कलेक्टर ने पंचायतों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने स्तर पर विश्वसनीय लोगों की मदद से इन दुकानों को तुरंत चालू करें।

 

कलेक्टर को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि सहकारी समितियां जानबूझकर धान खरीदी में रोड़े अटका रही हैं। किसानों को धान बेचने से रोका जा रहा था, मंडियों में पहुंचने पर तरह-तरह के बहाने बनाकर वापस भेजा जा रहा था। इन शिकायतों के बाद कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाते हुए ये कदम उठाया।

 

हड़ताल पर ESMA लागू, 12 कंप्यूटर ऑपरेटरों पर केस

राज्य सरकार ने सहकारी समितियों के कर्मचारियों की हड़ताल पर ESMA (छत्तीसगढ़ अति आवश्यक सेवा संधारण अधिनियम) लगा दिया है। कर्मचारियों को हड़ताल तुरंत खत्म कर मंडियों में ड्यूटी जॉइन करने के आदेश दिए गए थे, लेकिन कई कर्मचारी नहीं लौटे। इसके बाद कार्रवाई शुरू हो गई।

 

रायपुर जिले के चार थानों – पुरानी बस्ती, खरोरा, धरसींवा और तिल्दा-नेवरा में कुल 12 कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इनमें शामिल हैं…

 

– पुरानी बस्ती: राजू दास, ओमप्रकाश माहले, विजय गुप्ता, सुवेश, आनंद सहित अन्य

– धरसींवा: बृजमोहन देवांगन

– तिल्दा: रामकुमार वर्मा, पोषण लाल धुरंधर

– खरोरा: कौशल वर्मा

 

हड़ताली समिति प्रबंधकों को लगा झटका

कलेक्टर के इस फैसले से हड़ताल पर बैठी सहकारी समितियों के प्रबंधकों को तगड़ा झटका लगा है। समिति पदाधिकारियों का कहना है कि हड़ताल तोड़ने के लिए दबाव बनाने के मकसद से यह कदम उठाया गया है। हालांकि अभी तक हड़ताल वापस लेने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं आई है।

 

ग्रामीण क्षेत्रों में दशकों से राशन दुकानों का संचालन सहकारी समितियां ही कर रही थीं। अब अचानक ये जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों के कंधों पर आ गई है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि पंचायतें इन दुकानों को कितनी जल्दी और सुचारु रूप से चला पाती हैं।

Youthwings