रायगढ़ में कोयला ब्लॉक के विरोध में हिंसक हुआ धरना प्रदर्शन, 30 से अधिक ग्रामीण हिरासत में
रायगढ़ (छत्तीसगढ़)। रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में कोयला ब्लॉक आवंटन के विरोध में ग्रामीणों का 15 दिन पुराना धरना रविवार को हिंसक झड़प में बदल गया। पुलिस द्वारा धरनास्थल खाली कराने की कोशिश के दौरान ग्रामीणों ने पथराव शुरू कर दिया, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई। इस हिंसा में थाना प्रभारी (TI) कमला पुसांग गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि पुलिस ने करीब 30-35 ग्रामीणों को हिरासत में लेकर थाने पहुंचा दिया। क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।
15 दिनों से सीएचपी चौक पर धरना
ग्रामीण पिछले 15 दिनों से सीएचपी चौक (CHPH चौक) पर लगातार धरना दे रहे थे। उनकी मुख्य मांग थी कि प्रस्तावित जनसुनवाई को तत्काल निरस्त किया जाए। ग्रामीणों का आरोप है कि तमनार में प्रस्तावित कोल ब्लॉक से पर्यावरण को गंभीर नुकसान होगा, स्थानीय वन क्षेत्र नष्ट होंगे, जल स्रोत सूखेंगे और बड़े पैमाने पर विस्थापन होगा। ग्रामीणों का कहना है कि यह कोयला खनन उनके आजीविका, खेती और जीवन को खतरे में डाल रहा है।
पुलिस कार्रवाई के बाद भड़की हिंसा
रविवार को पुलिस ने धरना स्थल खाली कराने के लिए पहुंची। ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और स्थिति बिगड़ गई। पुलिस ने करीब 30-35 ग्रामीणों को नजरबंद कर थाने भेज दिया। इस कार्रवाई से नाराज ग्रामीणों ने हंगामा शुरू कर दिया। ग्रामीणों, खासकर महिलाओं ने पुलिस पर पथराव किया और TI कमला पुसांग को बुरी तरह मार-पीट दिया। TI गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।
पथराव कई दिशाओं से हुआ, जिसके बाद पुलिस को अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा। सूत्रों के अनुसार, पथराव के दौरान एक निजी बस में भी तोड़फोड़ की गई। इसके अलावा, धरना हटाने की प्रक्रिया के दौरान एक ग्रामीण रोड एक्सीडेंट में घायल हो गया, जिससे विवाद और भड़क गया।
क्षेत्र में भारी पुलिस तैनाती
हिंसा के बाद रायगढ़ पुलिस ने तमनार और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त फोर्स बुलाई गई है। पुलिस ने कहा कि शांति बनाए रखने के लिए सख्त कार्रवाई की जा रही है और हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।
ग्रामीणों का दावा
ग्रामीण नेताओं का कहना है कि पुलिस ने बिना किसी चेतावनी के बल प्रयोग किया, जबकि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था। वे जनसुनवाई रद्द करने और कोल ब्लॉक आवंटन पर पुनर्विचार की मांग पर अड़े हैं। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है और आंदोलनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
