PWD Tender Scam News: ब्लैकलिस्ट कंपनी को 13 करोड़ के ठेके, PWD विभाग में बड़े घोटाले का खुलासा

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PWD Tender Scam News में खुलासा हुआ है कि ब्लैकलिस्टेड कंपनी को छत्तीसगढ़ के PWD विभाग ने करीब 13 करोड़ रुपये के ठेके दे दिए। कंपनी पर झूठा शपथपत्र देकर टेंडर हासिल करने का आरोप है।

 

PWD विभाग में करोड़ों के टेंडर घोटाले का खुलासा

PWD Tender Scam News छत्तीसगढ़ के लोक निर्माण विभाग (PWD) की विद्युत एवं यांत्रिकी शाखा में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा पांच वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट की जा चुकी मेसर्स श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर कंपनी को विभाग ने करीब 13 करोड़ रुपये के ठेके आवंटित कर दिए। इस मामले के सामने आने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली और टेंडर प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार कंपनी ने टेंडर हासिल करने के लिए विभाग के सामने झूठा शपथपत्र प्रस्तुत किया। शपथपत्र में दावा किया गया कि कंपनी किसी भी सरकारी विभाग में ब्लैकलिस्ट या प्रतिबंधित नहीं है। जबकि दस्तावेजों से यह स्पष्ट हुआ है कि बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने वर्ष 2023 में कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया था।

 

बिलासपुर स्मार्ट सिटी ने किया था ब्लैकलिस्ट

PWD Tender Scam News दस्तावेजों के मुताबिक बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने कंपनी की निविदा सुरक्षा राशि जब्त करते हुए उसे पांच वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट किया था। साथ ही कंपनी को निविदा प्रक्रिया से भी बाहर कर दिया गया था।

इसके बावजूद कंपनी ने अन्य विभागों में खुद को क्लीन बताते हुए टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया और करोड़ों रुपये के सरकारी कार्य हासिल कर लिए। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर विभागीय अधिकारियों ने दस्तावेजों का सत्यापन किस आधार पर किया।

 

किन क्षेत्रों में दिए गए करोड़ों के ठेके

PWD Tender Scam News जानकारी के मुताबिक रायपुर, धमतरी और कुरूद क्षेत्र में आईडी CGeR07424 के तहत बिजली लाइन शिफ्टिंग और विद्युतीकरण का कार्य कंपनी को दिया गया। इस कार्य की कुल राशि लगभग 6 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

इसके अलावा बिलासपुर में खेल परिसर और विद्युत नवीनीकरण से जुड़े कार्यों के लिए करीब 4.87 करोड़ रुपये का ठेका कंपनी को मिला। वहीं नवा रायपुर और महासमुंद क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के दौरान बिजली लाइन शिफ्टिंग का कार्य भी कंपनी को सौंपा गया, जिसकी राशि करीब 2.15 करोड़ रुपये बताई गई है।

 

टेंडर नियमों के उल्लंघन के आरोप

PWD Tender Scam News निविदा शर्तों में साफ उल्लेख है कि ब्लैकलिस्टेड या डिबार ठेकेदारों को किसी भी प्रकार का सरकारी कार्य नहीं दिया जाएगा। इसके बावजूद ब्लैकलिस्ट कंपनी को टेंडर मिलना गंभीर लापरवाही या मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार स्टांप पेपर पर झूठा शपथपत्र देना जालसाजी, धोखाधड़ी और झूठी गवाही की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में तीन से सात वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान भी है।

 

विभागीय अधिकारियों ने क्या कहा

PWD Tender Scam News मामले में लोक निर्माण विभाग विद्युत एवं यांत्रिकी शाखा के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर सुरेश भूप्पल ने कहा कि बिना पूरी जानकारी के कुछ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि कंपनी दूसरे विभाग में ब्लैकलिस्ट थी, तो इसकी जानकारी विभाग तक कैसे पहुंची या नहीं पहुंची, इसकी जांच की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि कंपनी संचालक ने झूठा शपथपत्र दिया है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं विभाग के ईएनसी वीके भतपहरी ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया नियमों के अनुसार होती है और सभी दस्तावेजों की जांच की जाती है। उन्होंने मामले की जांच कराने की बात कही है।

 

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विभागीय सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

PWD Tender Scam News इस मामले के सामने आने के बाद विभागीय पारदर्शिता और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि कोई कंपनी पहले से ब्लैकलिस्ट थी, तो उसे सरकारी कार्य कैसे आवंटित कर दिए गए।

अब यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या अधिकारियों को पहले से इसकी जानकारी थी या फिर दस्तावेज जांच प्रक्रिया पूरी तरह विफल रही। मामले में मिलीभगत की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।

 

जांच के बाद हो सकती है बड़ी कार्रवाई

PWD Tender Scam News विभागीय सूत्रों के मुताबिक मामले की जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित अधिकारियों और कंपनी संचालकों पर कार्रवाई हो सकती है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो टेंडर निरस्त होने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी संभव है।

फिलहाल यह मामला प्रदेश में सरकारी टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर बड़ी बहस का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में जांच के बाद और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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