बिलासपुर में 10 से ज्यादा स्कूलों पर फर्जी CBSE पैटर्न का आरोप, सालभर पढ़ाई के बाद अब CG बोर्ड से परीक्षा

बिलासपुर। बिलासपुर में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के 10 से अधिक छोटे-बड़े स्कूलों पर आरोप है कि उन्होंने पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान खुद को CBSE पैटर्न का स्कूल बताकर सैकड़ों विद्यार्थियों का एडमिशन लिया, लेकिन सत्र खत्म होने पर बच्चों को छत्तीसगढ़ बोर्ड की परीक्षा में बैठाने की तैयारी कर दी।

 

जानकारी के अनुसार इन स्कूलों को CBSE की मान्यता 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होनी है। यानी जिस सत्र में छात्रों को CBSE पैटर्न का भरोसा देकर पढ़ाया गया, उस दौरान स्कूल के पास आधिकारिक मान्यता नहीं थी। अब कक्षा 5वीं और 8वीं के छात्रों को SCERT पैटर्न की परीक्षा देने के लिए तैयार किया जा रहा है, जिससे अभिभावकों में नाराजगी बढ़ गई है।

 

16 मार्च से परीक्षा, तैयारी का समय नहीं

इन स्कूलों में पूरे साल CBSE पैटर्न के अनुसार पढ़ाई कराने के बाद अब CG बोर्ड के अनुसार परीक्षा ली जा रही है। 16 मार्च से परीक्षा शुरू हो रही है, जिससे विद्यार्थियों के पास तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं है और अभिभावक भी इसे लेकर चिंतित हैं।

 

शिक्षा विभाग का पक्ष

अभिभावकों की शिकायत पर शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि CBSE पैटर्न कक्षा 9वीं से शुरू होता है और 8वीं तक CG और CBSE पैटर्न में ज्यादा अंतर नहीं होता। विभाग ने यह भी कहा है कि 8वीं के बाद CBSE बोर्ड में एडमिशन लेने में छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी और इसके लिए स्कूलों को निर्देश भी दिए गए हैं।

 

अभिभावकों ने उठाए सवाल

जानकारी के मुताबिक इन स्कूलों ने बड़ी संख्या में छात्रों का प्रवेश लेकर प्रति छात्र एक लाख रुपये से अधिक फीस वसूली। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब राज्य सरकार की ओर से छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम की किताबें मुफ्त उपलब्ध थीं, तो स्कूलों ने उनका उपयोग क्यों नहीं किया। आरोप है कि स्कूलों ने सरकारी किताबों की जगह छात्रों को निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने के लिए कहा।

 

अभिभावकों का कहना है कि जब पूरे साल पढ़ाई CBSE पैटर्न से कराई गई, तो परीक्षा CG बोर्ड से कैसे ली जा सकती है। उन्हें इस बात पर भी आपत्ति है कि छात्रों को CG बोर्ड की ही मार्कशीट दी जाएगी।

 

स्कूल प्रबंधन का जवाब

कुछ स्कूल प्रबंधनों का कहना है कि फीस केवल बोर्ड के आधार पर तय नहीं होती, बल्कि स्कूल की सुविधाओं, संसाधनों और शिक्षा की गुणवत्ता के आधार पर तय की जाती है। उनका यह भी कहना है कि NCERT और SCERT पाठ्यक्रम में बहुत अधिक अंतर नहीं होता और अच्छी तैयारी करने वाले छात्र राज्य बोर्ड की परीक्षा भी आसानी से दे सकते हैं।

 

डीईओ ने दिए जांच के निर्देश

इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी विजय तांडे ने बताया कि अभिभावकों की शिकायत मिलने के बाद संबंधित स्कूल प्रबंधनों को दस्तावेजों के साथ कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक CBSE की मान्यता नहीं थी, तब तक CBSE के नाम पर प्रवेश देना और उसी आधार पर पढ़ाई कराना नियमों के खिलाफ है। यदि ऐसा हुआ है तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि गंभीर अनियमितता मानी जाएगी और जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।

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