PM-CM Removal Bill: विपक्ष ने फाड़ी बिल की कॉपी, अमित शाह बोले – “हम इतने निर्लज्ज नहीं” “मैं जेल गया तो खुद दिया इस्तीफा”
नई दिल्ली। मोदी सरकार ने बुधवार को संसद में बड़ा कदम उठाते हुए गवर्नमेंट ऑफ यूनियन टेरिटरीज (संशोधन) बिल 2025 और 130वां संविधान संशोधन बिल 2025 समेत तीन अहम विधेयक लोकसभा में पेश किए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जब ये बिल सदन में रखे तो विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया और बिल की प्रतियां तक फाड़ डालीं।
विपक्ष का विरोध, बिल की प्रतियां फाड़ीं
कांग्रेस और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी समेत विपक्षी दलों ने इन विधेयकों का विरोध करते हुए इन्हें संविधान विरोधी बताया। समाजवादी पार्टी (सपा) ने बिल को “न्याय विरोधी” करार दिया और तत्काल वापसी की मांग की। भारी हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष के तेवरों से साफ है कि कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी हंगामा थमने वाला नहीं है।
शाह का पलटवार : “मैंने जेल जाने पर इस्तीफा दिया था”
अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा –
“जब मैं झूठे मामले में जेल गया था तो मैंने नैतिकता के आधार पर पद छोड़ दिया था। हम इतने निर्लज्ज नहीं हैं। मैं चाहता हूं कि राजनीति में नैतिकता के मूल्य बढ़ें।”
क्या है बिल में प्रावधान?
नए प्रावधान के मुताबिक –
- अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री किसी गंभीर अपराध में गिरफ्तार होते हैं और लगातार 30 दिन तक हिरासत में रहते हैं,
- तो 31वें दिन उन्हें पद से हटाना अनिवार्य होगा।
इस प्रावधान को सीधे तौर पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और तमिलनाडु के मंत्री वी. सेंथिल बालाजी के मामलों से जोड़कर देखा जा रहा है।
- केजरीवाल पद पर रहते हुए गिरफ्तार होने वाले पहले मुख्यमंत्री बने थे और करीब 6 महीने तक जेल में रहने के बावजूद इस्तीफा नहीं दिया।
- वहीं वी. सेंथिल बालाजी 241 दिनों तक जेल में रहते हुए मंत्री बने रहे।
विपक्ष बोला – “सरकारों को अस्थिर करने की साजिश”
लोकसभा में असदुद्दीन ओवैसी, मनीष तिवारी और एनके प्रेमचंद्रन ने इस बिल का विरोध किया। प्रेमचंद्रन ने कहा कि यह बिल जल्दबाजी में लाया गया है और इसका मकसद विपक्ष शासित राज्यों की सरकारों को अस्थिर करना है।
इस पर शाह ने कहा कि “बिल को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजा जाएगा।” यानी विस्तृत चर्चा और समीक्षा के बाद ही इसे लागू करने का रास्ता साफ होगा।
शशि थरूर का तंज – “गेमिंग बिल बेवजह”
सदन में हंगामे के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ऑनलाइन गेमिंग बिल पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा –
“सरकार को ऑनलाइन गेमिंग को लीगलाइज करना चाहिए था ताकि राजस्व बढ़े। लेकिन इस बिल की कोई जरूरत नहीं थी। अब क्योंकि सदन चल नहीं रहा है, हंगामे के बीच यह बिल पास हो जाएगा।”
