Pakistan- Afganistan War: ‘ओपन वॉर’ का ऐलान, काबुल-कंधार पर एयरस्ट्राइक

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा विवाद तेजी से भड़क गया है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने शुक्रवार को X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर अफगानिस्तान के तालिबान शासन के खिलाफ ‘ओपन वॉर’ का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद का सब्र अब जवाब दे गया है और अब दोनों देशों के बीच खुली जंग है।

ख्वाजा आसिफ ने अपनी पोस्ट में लिखा, “NATO सेनाओं के हटने के बाद उम्मीद थी कि अफगानिस्तान में शांति होगी… लेकिन तालिबान ने दुनिया भर के आतंकवादियों को इकट्ठा किया और टेररिज्म एक्सपोर्ट करना शुरू कर दिया। उन्होंने अपने लोगों को बेसिक ह्यूमन राइट्स से महरूम किया, खासकर महिलाओं के इस्लामी अधिकार छीन लिए।” उन्होंने आगे कहा, “हमारे सब्र का प्याला भर गया है। अब हमारे और आपके बीच खुली जंग है… पाकिस्तान की सेना समुद्र पार से नहीं आई, हम आपके पड़ोसी हैं। अल्लाहु अकबर।”

पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक और ऑपरेशन ‘गजब लिल हक’
पाकिस्तान ने काबुल, कंधार और पक्तिया प्रांतों में तालिबान के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक कीं। पाकिस्तानी सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने X पर पुष्टि की कि अफगान तालिबान के डिफेंस टारगेट्स को निशाना बनाया गया। पाकिस्तान ने इसे ‘ऑपरेशन गजब लिल हक’ नाम दिया। पाकिस्तानी पक्ष का दावा है कि 133 तालिबान लड़ाके मारे गए, 200 से ज्यादा घायल हुए, 27 चौकियां तबाह की गईं और 9 पर कब्जा किया गया।

तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तानी हमलों को “कायरतापूर्ण” बताया। उन्होंने कहा कि काबुल, कंधार और पक्तिया में हमले हुए, लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। अफगान नेशनल डिफेंस मिनिस्ट्री ने दावा किया कि गुरुवार रात डूरंड लाइन पर जवाबी ऑपरेशन में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, 2 बेस और 19 पोस्ट पर कब्जा किया गया। अफगान पक्ष ने इसे कुछ दिन पहले पाकिस्तानी घुसपैठ और हमलों का जवाब बताया, जिसमें महिलाओं और बच्चों की मौत हुई थी।

यह संघर्ष डूरंड लाइन (19वीं सदी में ब्रिटिश द्वारा खींची गई विवादित सीमा) पर सुरक्षा चिंताओं से जुड़ा है। पाकिस्तान तालिबान पर टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) जैसे मिलिटेंट्स को पनाह देने का आरोप लगाता है, जबकि तालिबान पाकिस्तानी हमलों की निंदा करता है। दोनों पक्षों के दावों में भारी अंतर है और स्वतंत्र सत्यापन नहीं हुआ है।

यह स्थिति कतर-मध्यस्थता वाले संभावित सीजफायर को खतरे में डाल रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित है, क्योंकि इससे क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ सकती है। दोनों देशों के बीच और संघर्ष की आशंका बनी हुई है।

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