P Chidambaram on GST: GST पर चिदंबरम का हमला, “GST मतलब गब्बर सिंह टैक्स”, सरकार को लोगों से माफी मांगनी चाहिए

P Chidambaram on GST

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P Chidambaram on GST: पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम (P. Chidambaram) ने हाल ही में GST दरों में कटौती पर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि जीएसटी दरों को घटाना भले ही सही कदम है, लेकिन इसे आठ साल पहले ही लागू कर देना चाहिए था। चिदंबरम ने सरकार से जनता से माफी मांगने की भी मांग की और जीएसटी में छह बड़े सुधार सुझाए।

“सही कदम, लेकिन बहुत देर से”

चिदंबरम ने इंडियन एक्सप्रेस में लिखे अपने लेख में याद दिलाया कि 2016 में संविधान संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान उन्होंने साफ कहा था कि जीएसटी एक अप्रत्यक्ष कर है, जो अमीर और गरीब दोनों पर बराबर लागू होता है। इसलिए इसकी दर 18% से ज्यादा रखना अन्यायपूर्ण होगा। उस समय उन्होंने मुख्य आर्थिक सलाहकार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि उभरते बाजारों में जीएसटी की औसत दर 14.1% और विकसित देशों में 16.8% रहती है। कांग्रेस ने भी 18% की दर का सुझाव दिया था।

सरकार पर ऊंची वसूली का आरोप

चिदंबरम का कहना है कि केंद्र ने यह तर्क दिया था कि कम दर से राज्यों को नुकसान होगा। लेकिन हकीकत में सरकार ने ऊंची दरों के जरिए उपभोक्ताओं से भारी वसूली की। उन्होंने आंकड़े पेश किए कि 2017-18 में जीएसटी से करीब 11 लाख करोड़ रुपये वसूले गए, जो 2024-25 में बढ़कर 22 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गए। इसका सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ा, खपत घटी और घरेलू कर्ज बढ़ा। उन्होंने याद दिलाया कि आम लोगों ने इसे “गब्बर सिंह टैक्स” कहा था।

रोज़मर्रा की चीजों पर अब कम टैक्स, पहले क्यों नहीं?

पूर्व वित्त मंत्री ने सवाल किया कि अगर आज टूथपेस्ट, हेयर ऑयल, घी, बच्चों के नैपकिन, पेंसिल-कॉपी, ट्रैक्टर और स्प्रिंकलर पर 5% जीएसटी दर लगाना सही है, तो पिछले आठ साल तक ज्यादा वसूली क्यों की गई।

चिदंबरम के 6 बड़े सुझाव

चिदंबरम ने जीएसटी को और बेहतर बनाने के लिए छह अहम सुधार सुझाए:

  1. भारत को एकल जीएसटी दर (Single GST Rate) की ओर बढ़ना चाहिए।

  2. कानून की जटिल भाषा खत्म कर इसे आसान बनाया जाए।

  3. फॉर्म और रिटर्न प्रक्रिया को सरल किया जाए और फाइलिंग की संख्या घटाई जाए।

  4. छोटे व्यापारियों और दुकानदारों को सीए की मदद की जरूरत न पड़े।

  5. जीएसटी कानूनों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर केवल आर्थिक दंड का प्रावधान हो।

  6. टैक्स अधिकारी व्यापारियों को अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा मानें, दुश्मन नहीं।

“सरकार को माफी मांगनी चाहिए”

लेख के अंत में चिदंबरम ने कहा कि भाजपा जीएसटी दरों में कटौती को अपनी जीत के रूप में पेश कर रही है, जबकि यह देर से उठाया गया सुधार है। उन्होंने साफ कहा कि केंद्र सरकार को आठ साल तक ऊंचे टैक्स ढांचे का बोझ झेलने के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए और उम्मीद जताई कि आगे के सुधारों के लिए देश को और इंतजार न करना पड़े।

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