UP के होंगे 4 टुकड़े, तारीख भी तय? जनसभा में ओम प्रकाश राजभर का दावा, जिसने लखनऊ से दिल्ली तक उड़ा दी सबकी नींद!
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में अपने बेबाक और चौंकाने वाले बयानों के लिए चर्चित कैबिनेट मंत्री एवं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने एक बार फिर बड़ा सियासी दांव चला है। एक जनसभा को संबोधित करते हुए राजभर ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश का चार अलग-अलग हिस्सों में बंटवारा होना तय है। इसके साथ ही उन्होंने पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की मांग को अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा से जोड़ते हुए ऐलान किया कि जब भी पूर्वांचल अलग राज्य बनेगा, उसका पहला मुख्यमंत्री राजभर का बेटा ही होगा।
27 फीसदी आरक्षण और पीएम मोदी से मुलाकात का किया जिक्र
जनसभा में राजभर ने 27 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे को उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई अपनी एक पुरानी मुलाकात का ब्योरा साझा किया।
राजभर ने कहा कि मैं आरक्षण के मुद्दे को लेकर देश के प्रधानमंत्री जी के पास गया था। उन्होंने कहा कि ओम प्रकाश जी आपकी बात तो जायज है लेकिन कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं।
उन्होंने आगे दावा किया कि जब उन्होंने इसका समाधान पूछा तो प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं जातिवार जनगणना करा देता हूं। जब जातियों की गिनती स्पष्ट हो जाएगी, तब इसके बंटवारे में कोई अड़चन नहीं आएगी।
‘चार राज्यों में विभाजन तय, पूर्वांचल का CM बनेगा राजभर का बेटा’
प्रधानमंत्री से हुई इसी कथित चर्चा को आधार बनाते हुए सुभासपा प्रमुख ने अपने सियासी एजेंडे को खुलकर मंच पर रखा। उन्होंने कहा कि मेरी मंशा साफ है, आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश का बंटवारा होगा और यह प्रदेश चार अलग-अलग भागों में बंटेगा।
राजभर ने पूर्वांचल को पृथक राज्य बनाने की अपनी पुरानी मांग दोहराते हुए सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर दावा ठोक दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिस दिन पूर्वांचल राज्य अलग बनेगा, सबसे पहले किसी जाति का मुख्यमंत्री होगा, तो वह राजभर का बेटा होगा।” मंत्री के इस ऐलान पर सभा में मौजूद कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने जोरदार नारेबाजी की।
मायावती के 2012 वाले प्रस्ताव की फिर हुई चर्चा
उत्तर प्रदेश को छोटे राज्यों में बांटने की बहस कोई नई नहीं है। साल 2012 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बहुजन समाज पार्टी की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने यूपी के विभाजन का ऐतिहासिक दांव चला था। मायावती सरकार ने उत्तर प्रदेश विधानसभा से प्रदेश को चार हिस्सों अवध प्रदेश, पूर्वांचल, बुंदेलखंड और पश्चिम प्रदेश में विभाजित करने का बाकायदा प्रस्ताव पारित कराकर केंद्र सरकार को भेजा था।
अब ओम प्रकाश राजभर द्वारा एक बार फिर उसी पुराने मुद्दे को हवा देने और मुख्यमंत्री पद पर सीधे दावेदारी पेश करने से सूबे की राजनीति में नए सियासी समीकरणों पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
