नितिन नबीन ने भरा राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का नामांकन, बीजेपी में नई रणनीति शुरू

नितिन नबीन

नितिन नबीन

रायपुर : भारतीय जनता पार्टी आने वाले राजनीतिक दौर से पहले संगठन और सरकार—दोनों स्तरों पर खुद को नए सिरे से मजबूत करने की तैयारी में है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, नितिन नबीन के बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की प्रक्रिया और मोदी 3.0 सरकार के दो साल पूरे होने से पहले बदलाव की यह कवायद तेज कर दी गई है। इसी क्रम में नितिन नबीन ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भी भर दिया है।

संगठन में नई पीढ़ी को आगे लाने की रणनीति

पार्टी सूत्रों का कहना है कि बीजेपी की राष्ट्रीय संगठन टीम का जल्द पुनर्गठन किया जाएगा। इस नई टीम में युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी और अधिकांश नए पदाधिकारियों की उम्र 55 वर्ष से कम रहने की संभावना है। राज्यों से नए चेहरों को राष्ट्रीय संगठन में शामिल कर उन्हें अहम जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं।

2029 लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर बदलाव

यह पूरी रणनीति 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी का लक्ष्य संगठन को अधिक मजबूत करना, कार्यकर्ताओं को सक्रिय बनाना और राजनीतिक संदेश को अधिक स्पष्ट व प्रभावी बनाना है। नई टीम में उन नेताओं को तरजीह दी जा सकती है जिनकी पृष्ठभूमि संघ से जुड़ी रही हो, हालांकि कुछ नए चेहरों को भी संगठन में जगह मिल सकती है।

मंत्रिपरिषद के कामकाज की हो रही समीक्षा

सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार में मंत्रियों के कामकाज और विभागीय जिम्मेदारियों की समीक्षा भी की जा रही है। वर्ष 2021 के बाद मंत्रिपरिषद में बड़े बदलाव नहीं हुए हैं। फिलहाल कई मंत्री एक से अधिक विभाग संभाल रहे हैं, जबकि कुछ नेता अपने राजनीतिक करियर के अंतिम चरण में हैं। नई संगठन टीम के गठन के बाद मंत्रिपरिषद में भी फेरबदल की संभावना जताई जा रही है।

बीजेपी शासित राज्यों में भी संभावित फेरबदल

पार्टी शासित राज्यों में भी हालात के अनुसार बदलाव पर विचार किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में सामाजिक संतुलन को लेकर मंथन जारी है, जहां किसी दलित नेता को बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है।

बिहार और राजस्थान में कैबिनेट विस्तार या बदलाव पर विचार हो रहा है।

वहीं मणिपुर में सरकार गठन को अंतिम रूप देने की कोशिशें तेज हैं।

राज्यसभा सीटों पर भी पार्टी की नजर

आने वाले एक साल में राज्यसभा की 70 से अधिक सीटें खाली होंगी, जिनमें से करीब 30 सीटें बीजेपी सांसदों की हैं। पार्टी को उम्मीद है कि वह कम से कम 33 सीटें जीतने में सफल रहेगी। उम्मीदवारों का चयन संगठनात्मक जरूरतों, प्रशासनिक अनुभव और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

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