भारत माला प्रोजेक्ट घोटाला: फरार अफसरों की तलाश में अटकी जांच, 14 नए संदिग्धों से होगी पूछताछ
रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित भारतमाला परियोजना घोटाले में जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू की कार्रवाई लगातार जारी है, लेकिन मुख्य आरोपी अब भी फरार हैं, जिससे जांच की रफ्तार धीमी पड़ गई है। इस बहुचर्चित घोटाले में अभनपुर तहसील के तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू, तहसीलदार शशिकांत कर्रे, राजस्व निरीक्षक रोशनलाल वर्मा, पटवारी दिनेश पटेल, गोबरानवापारा के नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण, और अन्य पटवारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
ईओडब्ल्यू अब तक हरमीत सलूजा, उमा तिवारी, केदार तिवारी और विजय जैन को गिरफ्तार कर चुकी है और इनसे पूछताछ भी की जा चुकी है, लेकिन घोटाले की जड़ तक अब तक नहीं पहुंचा जा सका है। असली सवाल यह है कि घोटाला की शुरुआत कहां और कैसे हुई, जिसका जवाब फरार अफसरों की गिरफ्तारी के बाद ही सामने आ सकेगा।
एनएचएआई अफसर भी शक के घेरे में
भारतमाला प्रोजेक्ट का नक्शा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा तैयार किया गया था। इसी नक्शे के आधार पर प्रभावित किसानों की जमीन का अधिग्रहण हुआ और मुआवजा बांटा गया। अब यह संदेह जताया जा रहा है कि नक्शा अधिसूचना जारी होने से पहले ही लीक हो गया था — या संभव है, जानबूझकर कराया गया हो। ऐसे में इस पूरे मामले में NHAI के कुछ अफसरों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है।
बैक डेट में जमीनों का टुकड़ों में बटवारा
सूत्रों के मुताबिक, अधिसूचना जारी होने के बाद ही नहीं, बल्कि उससे पहले ही कुछ किसानों की जमीनों को टुकड़ों में बांटकर उनके परिवारजनों के नाम चढ़ाया गया। इसका उद्देश्य अधिक मुआवजा प्राप्त करना था। जांच रिपोर्ट में ऐसे बैक डेट में किए गए बंटवारे का जिक्र है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि नक्शा लीक होने की जानकारी पहले से संबंधित लोगों को थी।
किसानों की मिलीभगत भी उजागर
घोटाले में प्रभावित किसानों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। जमीनों का टुकड़ों में बंटवारा कर उन्हें करोड़ों का मुआवजा मिला, जो सीधे उनके खातों में गया। लेकिन उसके बाद इन खातों से बड़ी राशि निकाली गई, जो संदेह को और गहरा करता है। इस पैसे की निकासी किसने और कैसे की — इसकी जांच भी जारी है।
14 नए संदिग्धों से होगी पूछताछ
अब तक की पूछताछ में 14 और नए संदिग्धों के नाम सामने आए हैं, जिनमें जमीन दलालों से लेकर राजस्व विभाग के कर्मचारी और अफसर तक शामिल हैं। ये संदिग्ध जगदलपुर, गरियाबंद और धमतरी जिलों से जुड़े बताए जा रहे हैं। ईओडब्ल्यू और एसीबी की टीम इन्हें नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुला सकती है।
घोटाले की रकम बढ़ने की आशंका
फिलहाल घोटाले की राशि करीब 48 करोड़ रुपए आंकी गई है, लेकिन जिस तरह अन्य जिलों में भी भारतमाला परियोजना के नाम पर जमीन अधिग्रहण हुआ है, उसमें रायपुर जैसी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में घोटाले की कुल रकम कई गुना बढ़ सकती है और जांच का दायरा भी व्यापक हो सकता है।
रायपुर पैटर्न से हुआ घोटाला
जांच में एक जैसे पैटर्न का संकेत मिला है — पहले प्रोजेक्ट की जानकारी लीक की गई, फिर जमीन दलालों और राजस्व अधिकारियों ने साठगांठ कर किसानों से सस्ती जमीन खरीदी, फिर टुकड़ों में बांटकर करोड़ों का मुनाफा कमाया। यही तरीका रायपुर के बाद अन्य जिलों में भी अपनाया गया हो सकता है।
