नया इनकम टैक्स कानून लागू, टैक्स सिस्टम में बड़े बदलाव

नए वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ भारत में नया इनकम टैक्स कानून 2025 लागू हो गया है, जिसने 1961 के पुराने कानून की जगह ले ली है। सरकार का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाना है, ताकि आम लोगों के लिए टैक्स भरना आसान हो सके।

 

नए कानून के तहत सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब फाइनेंशियल ईयर और असेसमेंट ईयर की जगह केवल एक टैक्स ईयर होगा। इससे पहले लोगों को FY और AY को लेकर काफी भ्रम रहता था, जिसे अब खत्म कर दिया गया है।

 

HRA क्लेम के नियम भी सख्त किए गए हैं। अब मकान किराया भत्ता लेने के लिए मकान मालिक का PAN और किराया भुगतान का प्रमाण देना अनिवार्य होगा। साथ ही पुणे और अहमदाबाद को भी मेट्रो शहरों की सूची में शामिल किया गया है, जहां 50 प्रतिशत तक HRA छूट मिलेगी।

 

आईटीआर भरने की डेडलाइन में भी बदलाव किया गया है। ITR-1 और ITR-2 की अंतिम तिथि 31 जुलाई ही रहेगी, जबकि ITR-3 और ITR-4 की अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है।

 

शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए भी नियम बदले गए हैं। सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स में बढ़ोतरी के कारण फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग महंगी हो गई है। इससे डेरिवेटिव ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

 

PAN कार्ड से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब केवल आधार कार्ड के आधार पर PAN बनवाना संभव नहीं होगा और बड़े लेनदेन जैसे 10 लाख रुपये से अधिक कैश जमा, 5 लाख रुपये से अधिक की खरीदारी और 20 लाख रुपये से अधिक की प्रॉपर्टी डील पर PAN अनिवार्य कर दिया गया है।

 

कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले फूड कार्ड पर टैक्स फ्री लिमिट बढ़ाकर 200 रुपये प्रति मील कर दी गई है। इसके अलावा गिफ्ट कार्ड और वाउचर पर टैक्स छूट की सीमा 5,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दी गई है।

 

एजुकेशन और हॉस्टल अलाउंस में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है। बच्चों के लिए एजुकेशन अलाउंस 3,000 रुपये प्रति माह और हॉस्टल अलाउंस 9,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है।

 

इनकम टैक्स फॉर्म के नाम भी बदले गए हैं। फॉर्म 16 की जगह अब फॉर्म 130 और फॉर्म 26AS की जगह फॉर्म 168 जैसे नए नाम लागू किए गए हैं।

 

इसके अलावा शेयर बायबैक पर अब कैपिटल गेन के तहत टैक्स लगाया जाएगा, जिससे कुछ निवेशकों पर टैक्स का बोझ बढ़ सकता है।

 

इन सभी बदलावों का असर सीधे तौर पर टैक्सपेयर्स पर पड़ेगा और लोगों को नए नियमों के अनुसार अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग करनी होगी।

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