1 अप्रैल से नई बार पॉलिसी : बड़े रेस्टोरेंट नहीं बेच सकेंगे सस्ती शराब, कलेक्टर देंगे पार्टी की अनुमति
1 अप्रैल से नई बार पॉलिसी
छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री और उपभोग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बार पॉलिसी जारी कर दी है, जो 1 अप्रैल 2026 से पूरे राज्य में लागू होगी। इस नीति के तहत अब सभी स्तरीय रेस्टोरेंट में कम कीमत वाली सी ग्रेड शराब की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। ऐसे रेस्टोरेंट अब केवल हाईग्रेड शराब ही परोस सकेंगे।
अब रेस्टोरेंट में सिर्फ हाईग्रेड शराब
नई नीति के अनुसार, राज्य के सभी स्तरीय रेस्टोरेंट में अब केवल उच्च गुणवत्ता वाली शराब ही उपलब्ध रहेगी। पहले रेस्टोरेंट में किस श्रेणी की शराब परोसी जाएगी, इसका कोई स्पष्ट मानक तय नहीं था। लेकिन अब इस बदलाव के बाद सी ग्रेड शराब की बिक्री पूरी तरह बंद कर दी गई है।
आबकारी विभाग के सूत्रों का मानना है कि इस फैसले के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला, स्तरीय रेस्टोरेंट की गरिमा बनाए रखना और दूसरा, राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी करना। हाईग्रेड शराब की कीमत अधिक होने के कारण सरकार को इससे अधिक टैक्स और राजस्व प्राप्त होगा।
शराब पार्टी की अनुमति अब कलेक्टर देंगे
नई बार पॉलिसी में एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब होटल, बैंक्वेट हॉल या अन्य स्थानों पर शराब पार्टी या कॉन्फ्रेंस आयोजित करने के लिए आबकारी आयुक्त से पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। यह अधिकार अब सीधे जिले के कलेक्टर को दे दिया गया है। इस बदलाव से पार्टी या आयोजन करने वालों को काफी राहत मिलेगी, क्योंकि अब उन्हें जिला स्तर पर ही लाइसेंस मिल सकेगा। इससे अनुमति प्रक्रिया सरल और तेज होगी।
एफएल-5 और एफएल-5क लाइसेंस के नए नियम
वर्ष 2026-27 की नीति में एफएल-5 और एफएल-5क लाइसेंस से जुड़े नियमों को भी स्पष्ट किया गया है। कलेक्टर द्वारा लाइसेंस जारी करने से पहले संबंधित स्थल का नियमानुसार निरीक्षण किया जाएगा। लाइसेंसधारी को यह अनिवार्य होगा कि वह पार्टी, आयोजन या कॉन्फ्रेंस से जुड़ा पूरा विवरण अभिलेख के रूप में सुरक्षित रखे।
निरीक्षण के दौरान आबकारी विभाग के अधिकारी इन अभिलेखों की जांच करेंगे। शराब पीने और पिलाने की समय-सीमा दोपहर 12 बजे से रात 12 बजे तक निर्धारित की गई है।
बची हुई शराब नष्ट करना होगा अनिवार्य
नई नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बाद बची हुई शराब का पूरा विवरण आबकारी विभाग को सौंपना होगा। यदि उपभोग से शेष रही शराब का अभ्यर्पण नहीं किया गया, तो उसे अवैध माना जाएगा।
ऐसी स्थिति में जिला स्तर पर गठित समिति के माध्यम से बची हुई शराब का नियमानुसार नष्टीकरण किया जाएगा। यह प्रावधान अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाने के उद्देश्य से किया गया है।
अवैध शराब पर लगेगी लगाम
सूत्रों के अनुसार, कलेक्टर को अनुमति देने का अधिकार इसलिए दिया गया है ताकि लोग वैध तरीके से शराब पार्टी आयोजित कर सकें। पहले फार्महाउस या निजी स्थानों पर बिना अनुमति शराब परोसना अपराध की श्रेणी में आता था, लेकिन अब लोग अपने जिले के कलेक्टर से लाइसेंस लेकर कानूनी रूप से आयोजन कर सकेंगे।सरकार का मानना है कि इन बदलावों से न सिर्फ अवैध शराब पर नियंत्रण होगा, बल्कि राज्य के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
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