पेपर लीक, परीक्षा रद्द और अब हेलीकॉप्टरों में उड़ा रहे प्रश्नपत्र! अब सेना के सहारे सिस्टम? NEET री-एग्जाम पर बड़े सवाल

पेपर लीक के बाद आर्मी का सहारा, लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद.. क्या परीक्षा व्यवस्था अब सेना पर निर्भर हो गई है?

 

NEET UG 2026 की मूल परीक्षा 3 मई को हुई, जिसमें 22 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। मात्र कुछ दिनों बाद सोशल मीडिया पर वायरल “सैंपल पेपर” ने पूरे देश को हिला दिया। इसमें मुख्य परीक्षा के कई सवाल हूबहू मिले। जांच में पेपर लीक के ठोस संकेत मिलने के बाद शिक्षा मंत्रालय और NTA ने परीक्षा रद्द कर दी। अब 21 जून को री-एग्जाम हो रहा है, लेकिन इस बार सुरक्षा के नाम पर अभूतपूर्व कदम उठाए जा रहे हैं भारतीय वायुसेना (IAF) के Mi-17 हेलीकॉप्टर और अन्य सैन्य विमान गोपनीय प्रश्नपत्रों को 18 प्रमुख केंद्रों से परीक्षा स्थलों तक पहुंचाएंगे।

 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया। सूत्रों के मुताबिक, पेपर सेटर्स, ट्रांसलेटर्स और संबंधित स्टाफ को बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग-थलग रखा गया है। उनके मोबाइल, इंटरनेट सब बंद। यह सब पिछले लीक के “सबक” के रूप में बताया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है इतनी भारी-भरकम व्यवस्था क्यों? क्या NTA और केंद्र सरकार की मूल व्यवस्था इतनी खोखली हो चुकी है कि अब वायुसेना को बुलाना पड़े?

 

सिस्टेमिक फेलियर की कहानी

 

यह पहली बार नहीं है। 2024 में भी NEET में पेपर लीक, ग्रेस मार्किंग और अनियमितताओं का घोटाला हुआ था। 2026 में फिर वही तस्वीर। राजस्थान के कोचिंग हब्स से व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर “गेस पेपर” घूम रहा था, जिसमें 140 तक सवाल मैच कर गए। CBI और राजस्थान पुलिस की जांच में कई गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन मास्टरमाइंड्स अभी भी छूटे हुए लगते हैं। NTA का दावा है कि अब सब सुरक्षित है, लेकिन लाखों छात्रों का एक साल बर्बाद हो चुका है। कई छात्रों की आत्महत्या की खबरें आईं। अभिभावक और छात्र सड़कों पर उतर आए, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

 

सरकार की तरफ से “अभूतपूर्व सुरक्षा” का प्रचार किया जा रहा है। पेपर एयरलिफ्टिंग, आइसोलेशन, डिजिटल एन्क्रिप्शन सब कुछ। लेकिन क्या यह समाधान है या समस्या को छुपाने की कोशिश? NTA जैसी संस्था, जो करोड़ों छात्रों की जिंदगी तय करती है, बार-बार फेल हो रही है। फिर भी इसकी जवाबदेही तय नहीं होती। NTA पर मुनाफा कमाने का आरोप भी लगता रहा है, जबकि मूल ढांचा कमजोर है।

 

IAF का इस्तेमाल एक स्वीकारोक्ति है। राष्ट्रीय परीक्षा को सुरक्षित रखने के लिए देश की वायुसेना को उतारना पड़ रहा है। यह दर्शाता है कि सिविल प्रशासन और शिक्षा मंत्रालय पर भरोसा नहीं बचा। क्या अगली बार टैंक और जवान भी बुलाए जाएंगे? परीक्षा प्रक्रिया का Militarization छात्रों के विश्वास को और तोड़ेगा, न कि बढ़ाएगा।

 

 छात्रों पर दोहरा बोझ

 

22 लाख छात्र दोबारा परीक्षा देंगे। तैयारी का एक चक्र फिर से। कोचिंग फीस, यात्रा, मानसिक तनाव सब कुछ। ग्रामीण और मध्यम वर्ग के छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। कोचिंग माफिया, पैसे वाले नेटवर्क और राजनीतिक संरक्षण के आरोप लगातार उठते रहे, लेकिन ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं देती। CBI जांच चल रही है, लेकिन कितनी पारदर्शी होगी, यह सवाल बना हुआ है।

 

सरकार बार-बार कहती है कि “छात्रों का भविष्य सर्वोपरि” है। लेकिन रद्द हुई परीक्षा, देरी और अनिश्चितता ने साबित कर दिया कि यह सिर्फ शब्द हैं। NEET को एकल परीक्षा बनाने का फैसला पहले ही विवादास्पद रहा। अब बार-बार लीक होने से यह सिस्टम की जड़ों पर सवाल खड़ा करता है। विकेंद्रीकरण, राज्य स्तर की परीक्षाओं और NTA के overhaul की मांग तेज हो रही है।

 

किसके सर फोड़े ठीकरा?

 

मोदी सरकार के कार्यकाल में शिक्षा क्षेत्र में डिजिटलीकरण और सुधारों का ढिंढोरा पीटा गया, लेकिन NEET-CUET जैसे घोटालों ने छवि खराब की। विपक्ष INDIA गठबंधन सहित कई दल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। छात्र आंदोलन पूरे देश में फैले हुए हैं। सरकार इसे “विपक्षी साजिश” बताकर टाल रही है, जबकि समस्या संरचनात्मक है।

 

पेपर प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्ट, स्टोरेज हर चरण में कमजोरियां उजागर हुईं। अब Mi-17 हेलीकॉप्टर उड़ाए जा रहे हैं। यह दिखावा है। असली समाधान पारदर्शिता, तकनीकी अपग्रेडेशन, सख्त सजा और कोचिंग माफिया पर नकेल है। लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति नजर नहीं आती।

 

aspirants का बार-बार टूटता सपना

 

21 जून का री-एग्जाम शांतिपूर्ण हो, यह हर किसी की कामना है। लेकिन IAF वाले “सुरक्षा थिएटर” से ज्यादा जरूरी है NTA और सरकार द्वारा जवाबदेही स्वीकार करना। लाखों मेडिकल aspirants का सपना बार-बार टूट रहा है। अगर सिस्टम नहीं बदला तो NEET का भरोसा हमेशा के लिए चला जाएगा।

 

सरकार को अब सिर्फ प्रचार नहीं, ठोस सुधार करने चाहिए। अन्यथा हर साल यही सिलसिला चलेगा लीक, रद्द, आर्मी, और छात्रों का रोना। NEET 2026 की यह कहानी सिर्फ एक परीक्षा की नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की नाकामी की मिसाल बन गई है।

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