Mukesh Chandrakar Murder Case में नया खुलासा! पत्रकारों ने एसपी से की बड़ी शिकायत
Mukesh Chandrakar Murder Case: दो पत्रकारों ने एसपी को लिखित शिकायत देकर गवाहों को प्रभावित करने और बयान बदलवाने के प्रयास का लगाया आरोप, निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग
Mukesh Chandrakar Murder Case में अब एक नया और गंभीर आरोप सामने आया है। दावा किया गया है कि प्रमुख गवाहों को पैसे का लालच देकर उनके बयान बदलवाने की कोशिश की जा रही है। आखिर किसने दिया एक लाख रुपये का ऑफर और क्यों बढ़ गई मामले की संवेदनशीलता? पढ़िए पूरी रिपोर्ट।
Mukesh Chandrakar Murder Case: गवाहों को बयान बदलने के लिए लालच देने का आरोप, पत्रकारों ने एसपी से की कार्रवाई की मांग
Mukesh Chandrakar Murder Case: चर्चित पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्याकांड में एक नया और गंभीर मोड़ सामने आया है। मामले से जुड़े दो पत्रकारों ने बीजापुर पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि प्रकरण के प्रमुख गवाहों को प्रभावित करने और उनके बयान बदलवाने की कोशिश की जा रही है। शिकायतकर्ताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
गवाहों को प्रलोभन देने का आरोप
पत्रकार चेतन कोपवार और पवन दुर्गम द्वारा दी गई शिकायत में दावा किया गया है कि कुछ लोग गवाहों को धनराशि और अन्य प्रकार के प्रलोभन देकर उनके बयान बदलवाने का प्रयास कर रहे हैं। शिकायत के अनुसार बीजापुर निवासी सुनील मर्सकोले ने मोबाइल फोन के माध्यम से पत्रकार चेतन कोपवार से संपर्क किया और मुख्य आरोपी सुरेश चंद्राकर के पक्ष में बयान देने के बदले एक लाख रुपये देने का प्रस्ताव रखा।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह प्रयास न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने और मामले की जांच को कमजोर करने की मंशा से किया गया।
पत्रकार पवन दुर्गम का भी लिया गया नाम
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि बातचीत के दौरान पत्रकार पवन दुर्गम का नाम लिया गया और कहा गया कि उनसे भी इस विषय पर चर्चा की गई है। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि पवन दुर्गम का बयान पहले ही न्यायालय में दर्ज हो चुका है, जिसमें उन्होंने मुकेश चंद्राकर के पक्ष और आरोपियों के खिलाफ महत्वपूर्ण जानकारी दी है।
निष्पक्ष जांच को प्रभावित करने की कोशिश?
शिकायत में कहा गया है कि गवाहों को अलग-अलग राशि का लालच देकर उनके बयान बदलवाने की कोशिश करना न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप का गंभीर मामला है। पत्रकारों का कहना है कि गवाहों पर दबाव, धमकी या प्रलोभन डालना कानूनन अपराध है और इससे निष्पक्ष न्याय व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

गवाहों की सुरक्षा की भी मांग
शिकायतकर्ताओं ने पुलिस अधीक्षक से यह भी मांग की है कि मामले के प्रमुख गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि गवाहों को ऐसा माहौल मिलना चाहिए, जहां वे बिना किसी भय, दबाव या लालच के न्यायालय और जांच एजेंसियों के समक्ष अपना पक्ष रख सकें।
3 जनवरी को मिला था मुकेश चंद्राकर का शव
गौरतलब है कि पत्रकार मुकेश चंद्राकर का शव 3 जनवरी को बीजापुर में एक सेप्टिक टैंक से बरामद किया गया था। इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने ठेकेदार सुरेश चंद्राकर, रितेश चंद्राकर, दिनेश चंद्राकर और महेंद्र रामटेके को गिरफ्तार किया था।
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया था कि पत्रकार की हत्या सुनियोजित तरीके से की गई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार सुरेश चंद्राकर को इस Mukesh Chandrakar Murder Case का मुख्य साजिशकर्ता माना गया था।
निर्माण कार्यों की खबर के बाद बढ़ा था विवाद
जांच में यह भी सामने आया था कि मुकेश चंद्राकर ने कुछ समय पहले सुरेश चंद्राकर के कथित गुणवत्ताहीन निर्माण कार्यों को लेकर खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ा था। पुलिस और एसआईटी की जांच में दावा किया गया था कि हत्या की साजिश पहले से रची गई थी और इसमें कई लोग शामिल थे।
अब गवाहों को प्रभावित करने के आरोप सामने आने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं
