MP वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों की नियुक्ति पर बवाल, मुस्लिम संगठन बोले- ‘संस्थाओं पर कब्जा’, हिंदू धर्मगुरुओं ने कहा- ‘संवैधानिक और जरूरी’
पहली बार गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने के फैसले पर भोपाल में सियासी-धार्मिक घमासान, कांग्रेस विधायक ने सुप्रीम कोर्ट जाने की दी चेतावनी
भोपाल। मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन में पहली बार गैर-मुस्लिम (हिंदू) सदस्यों को शामिल किए जाने के फैसले पर राजधानी भोपाल में सियासी और धार्मिक घमासान छिड़ गया है। इस फैसले के विरोध में जहां मुस्लिम संगठनों और कांग्रेस विधायक ने मोर्चा खोलते हुए कोर्ट जाने की चेतावनी दी है, वहीं हिंदू धर्मगुरुओं और संगठनों ने सरकार के इस कदम को पूरी तरह संवैधानिक और जरूरी बताया है। पुराने भोपाल के बुधवारा इलाके में इसे लेकर विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए हैं।
संस्थाओं पर जबरन कब्जा करने की कोशिश
वक्फ बोर्ड में हिंदुओं की नियुक्ति को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी ने कड़ा ऐतराज जताया है। कमेटी के पदाधिकारियों का कहना है कि यह उनकी संस्थाओं पर जबरन कब्जा करने की कोशिश है। मुस्लिम स्कॉलर इमरान खोखर ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, “जिन लोगों को इस्लाम के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है, उन्हें बोर्ड का सदस्य बनाकर सरकार क्या मैसेज देना चाहती है? क्या किसी मुस्लिम को महाकाल या राम मंदिर समिति का सदस्य बनाया जा सकता है?”
फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाऊंगा: कांग्रेस विधायक
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भी इस पुनर्गठन का पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा कि वक्फ संशोधन का मामला अभी भी प्रक्रिया में है, ऐसे में दो की जगह तीन गैर-मुस्लिम सदस्य कैसे नियुक्त कर दिए गए? मसूद ने कहा, “यह पूरा मामला पहले से ही अदालत में है, इसलिए इस फैसले के खिलाफ मैं सुप्रीम कोर्ट जाऊंगा। अंतिम फैसला शीर्ष अदालत ही करेगी।”
हिंदू धर्मगुरुओं ने कहा- संवैधानिक फैसला
अखिल भारतीय साधु संत सन्यासी समिति के कार्यकारी अध्यक्ष अनिलानंद महाराज ने सरकार के इस फैसले को एक अच्छी और प्रगतिशील पहल बताया। उन्होंने विरोध करने वालों पर तीखा हमला करते हुए कहा, “वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों के आने से सिर्फ उन मुसलमानों को दर्द हो रहा है, जिन्होंने वक्फ की करोड़ों रुपये की जमीनों पर अवैध कब्जा कर रखा है।”
संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने भी इस पहल को पूरी तरह संवैधानिक करार देते हुए तंज कसा, “अगर इनका बस चले, तो ये भोपाल के बड़े तालाब और हमारे देवी-देवताओं को भी वक्फ की प्रॉपर्टी घोषित कर दें।”
फिलहाल, वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन को लेकर भोपाल की सड़कों से लेकर कोर्ट के कमरों तक एक नई कानूनी और राजनीतिक जंग शुरू होती नजर आ रही है।
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