राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी विवाद: सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा- “मुझे हटाए बिना अध्यक्ष की घोषणा वैधानिक नहीं”

रायपुर: छत्तीसगढ़ में 9 से 13 जनवरी तक बालोद जिले के दुधली में प्रस्तावित प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी को लेकर सियासत गरमा गई है। दिल्ली से देर रात रायपुर लौटने के बाद रायपुर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि भारत स्काउट्स एंड गाइड्स (छत्तीसगढ़) की राज्य परिषद में वैधानिक प्रक्रिया की पूरी तरह अनदेखी की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैधानिक अध्यक्ष होने के बावजूद उन्हें हटाए बिना नए अध्यक्ष की घोषणा करना नियमों के खिलाफ है, जिसके चलते उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का रुख किया है।

वैधानिक अध्यक्ष हूं, मुझे हटाए बिना घोषणा अवैध

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, “मैं वैधानिक अध्यक्ष हूं। परिषद ने जंबूरी स्थगित करने का निर्णय लिया था। मैंने पार्टी और सरकार के वरिष्ठ लोगों को पहले ही सूचित कर दिया था कि अध्यक्ष पद पांच साल के लिए होता है। अगर मुझे हटाए बिना कोई नया अध्यक्ष घोषित किया जाएगा, तो मैं कोर्ट जाऊंगा। मैं कोर्ट गया हूं। मुझे हटाए बिना जो अध्यक्ष की घोषणा सरकार ने की है, वह वैधानिक नहीं है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि परिषद में नियमों का पालन नहीं किया गया। कोई पूर्व सूचना, सुनवाई या पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया। सांसद ने कहा कि इस वजह से उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें अध्यक्ष पद से हटाने के प्रस्ताव को असंवैधानिक और एकतरफा बताया गया है।

 

टीएस सिंहदेव के बयान पर तीखा पलटवार

पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के बृजमोहन अग्रवाल की स्थिति पर “दुख होता है” वाले बयान पर सांसद ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा, “मेरी स्थिति पर किसी को दुखी या खुश होने की जरूरत नहीं है। मैं अपनी स्थिति खुद बना लेता हूं। जनता ने मुझे सांसद बनाया है, मैं जनता के बीच हूं और जनता के मुद्दों पर लड़ता रहूंगा।”

दिल्ली दौरे के दौरान क्या-क्या बैठकें हुईं?

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने दिल्ली प्रवास के दौरान तीन महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लिया।

केमिकल फर्टिलाइजर की बैठक – इस बैठक का मुख्य उद्देश्य देशभर के किसानों को सस्ती खाद उपलब्ध कराना था। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्या को लेकर केंद्र स्तर पर गंभीर चर्चा हुई।

जेपीसी की बैठक – इसमें 1/30 अमेंडमेंट बिल पर चर्चा हुई। इस बिल के तहत यदि कोई मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री या मंत्री 30 दिनों के लिए जेल चला जाता है, तो उसका पद अपने आप समाप्त हो जाएगा।

एस्टिमेट कमेटी की बैठक – इसमें स्कूल शिक्षा और समग्र शिक्षा को नवोदय विद्यालयों को देने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई।

जंबूरी विवाद का पूरा मामला

राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के खेमे से 13 दिसंबर 2025 को एक आदेश जारी किया गया, जिसमें उन्हें पदेन अध्यक्ष बताया गया। सांसद अग्रवाल का दावा है कि वे वैधानिक अध्यक्ष हैं और उन्हें हटाने की कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।

सांसद ने आरोप लगाया कि जंबूरी में करीब 10 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आई है। आयोजन मूल रूप से नवा रायपुर में प्रस्तावित था, लेकिन बिना वैधानिक प्रक्रिया के इसे बालोद जिले के दुधली में स्थानांतरित कर दिया गया।

सरकार का रुख

राज्य सरकार ने प्रेस नोट जारी कर स्पष्ट किया है कि जंबूरी अपने तय कार्यक्रम के अनुसार 9 से 13 जनवरी तक दुधली में ही आयोजित होगी। सरकार का कहना है कि सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और आयोजन निर्धारित तारीख पर होगा।

राजनीतिक निहितार्थ

यह विवाद छत्तीसगढ़ में भाजपा के अंदरूनी कलह को उजागर करता है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल और मंत्री गजेंद्र यादव दोनों भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं। स्काउट्स एंड गाइड्स एक राष्ट्रीय संगठन है, जिसका शिक्षा विभाग से गहरा संबंध है। अध्यक्ष पद पर विवाद से आयोजन की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं।

अब सबकी नजर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी है।

जंबूरी में देशभर से करीब 15 हजार रोवर-रेंजर हिस्सा लेने वाले हैं। यदि आयोजन प्रभावित होता है, तो इससे युवाओं के उत्साह और राज्य की छवि पर असर पड़ सकता है।

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