CSVTU फार्मेसी पेपर लीक: MJ कॉलेज की बड़ी लापरवाही! अब संबद्धता पर संकट

रायपुर/भिलाई। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU) की फार्मेसी चौथे सेमेस्टर की परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक प्रकरण लगातार नए खुलासों के साथ तूल पकड़ रहा है। यह मामला 11 अगस्त को एमजे कॉलेज ऑफ फार्मेसी में हुए पेपर लीक से जुड़ा है। अब विश्वविद्यालय ने संकेत दिए हैं कि एमजे कॉलेज की संबद्धता समाप्त करने पर विचार किया जा सकता है। साथ ही इस पूरे मामले की जानकारी फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया को भी भेजी जाएगी।

सीएसवीटीयू की सख्त टिप्पणी
विश्वविद्यालय का कहना है कि एमजे फार्मेसी कॉलेज बेसिक जरूरतों के साथ परीक्षा कराने में भी विफल साबित हुआ है। यदि कोई कॉलेज परीक्षा जैसी जिम्मेदारी निभाने में सक्षम नहीं है, तो उसकी संबद्धता पर पुनर्विचार होना चाहिए।

कॉलेज ने दिया अपना पक्ष
एमजे कॉलेज प्रबंधन ने सीएसवीटीयू को अपना लिखित जवाब भेजा है, जिसमें पेपर लीक और परीक्षा के दिन की मिनट-टू-मिनट घटनाओं का ब्यौरा दिया गया है। कॉलेज ने विश्वविद्यालय से पत्राचार करते हुए परीक्षा केंद्र बंद करने का अनुरोध भी किया है। उनका कहना है कि अधिक छात्र संख्या के कारण परीक्षा कार्य में कठिनाइयां आ रही हैं।

कैसे हुआ पेपर लीक
11 अगस्त को फार्मेसी चौथे सेमेस्टर की मेडिशनल केमिस्ट्री परीक्षा के दौरान बड़ी लापरवाही सामने आई। कई परीक्षार्थियों को गलती से 18 अगस्त को होने वाली फार्माकोलॉजी का प्रश्नपत्र बांट दिया गया। प्रश्नपत्र पर विषय कोड और नाम स्पष्ट होने के बावजूद न तो केंद्राध्यक्ष और न ही पर्यवेक्षक ने इसे पहचाना। जब छात्रों ने शिकायत की, तब हड़कंप मच गया। आनन-फानन में गलत प्रश्नपत्र और उत्तरपुस्तिकाएं वापस ली गईं, लेकिन इस दौरान परीक्षार्थियों का करीब 30 मिनट बर्बाद हो गया। इसके बाद विश्वविद्यालय ने 18 अगस्त की परीक्षा स्थगित करने का आदेश जारी किया।

क्या विश्वविद्यालय से भी हुई चूक?
परीक्षा के प्रश्नपत्र सीधे प्रिंटिंग यूनिट से विश्वविद्यालय आते हैं और वहां से कॉलेजवार पैक कर भेजे जाते हैं। संभावना जताई जा रही है कि प्रश्नपत्र पैकिंग के दौरान ही गलती हुई हो और गलत पैकेट कॉलेज को भेज दिया गया हो। यह चूक न केवल कॉलेज स्तर पर, बल्कि विश्वविद्यालय परीक्षा विभाग से भी हुई हो सकती है। विवि के कुलसचिव ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है और स्पष्ट किया है कि यदि विश्वविद्यालय के कर्मचारी या अधिकारी की गलती पाई गई, तो उन पर भी कार्रवाई होगी।

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