MGNREGA HR Policy : 15 दिन का वादा, 20 महीने का इंतजार: मनरेगा कर्मियों की HR पॉलिसी अभी तक दफ्तरों में बंद
मनरेगा कर्मचारियों की HR पॉलिसी 20 महीने बाद भी लंबित, कर्मचारियों ने उठाई आवाज, उपमुख्यमंत्री से की गई मुलाकात
MGNREGA HR Policy : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मनरेगा कर्मचारियों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा सामने आया है। सरकार बनने के बाद मनरेगा कर्मचारियों के लिए बेहतर मानव संसाधन (HR) पॉलिसी तैयार करने के उद्देश्य से एक कमिटी का गठन किया गया था, जिसे 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि 20 महीने बीत जाने के बाद भी यह फाइल दफ्तरों में लंबित पड़ी हुई है।
महासंघ ने उठाई कर्मचारियों की मांग
MGNREGA HR Policy : इस मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ की प्रांतीय टीम ने राज्य स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने मनरेगा कर्मचारियों के लिए एचआर पॉलिसी, सामाजिक सुरक्षा, भविष्य सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर ठोस कदम उठाने की मांग की।
वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों के लिए नीति का अभाव
MGNREGA HR Policy : महासंघ ने बताया कि राज्य में कई मनरेगा कर्मचारी पिछले 15 से 20 वर्षों से लगातार कार्यरत हैं, लेकिन उनके लिए अब तक कोई स्पष्ट एचआर पॉलिसी नहीं बनाई गई है। इससे कर्मचारियों को भविष्य को लेकर असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
PF और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी
MGNREGA HR Policy : कर्मचारियों ने यह भी कहा कि उन्हें भविष्य निधि (PF), सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। जबकि अन्य योजनाओं जैसे NHM, ICDS और NRLM में कार्यरत कर्मचारियों के लिए राज्य स्तर पर एचआर नीति लागू की जा चुकी है।

“अकुशल” कहे जाने पर जताई नाराजगी
MGNREGA HR Policy : महासंघ ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि मनरेगा कर्मचारियों को ‘अकुशल’ श्रेणी में रखा जाता है। उनका कहना है कि वे तकनीकी डिग्री के आधार पर विधिवत भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से नियुक्त हुए हैं, ऐसे में उन्हें अकुशल कहना उनके अनुभव और योग्यता का अपमान है।
राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की उपलब्धियां
MGNREGA HR Policy : महासंघ ने यह भी बताया कि मनरेगा कर्मचारियों के योगदान से छत्तीसगढ़ ने मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY-G) के क्रियान्वयन में राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान हासिल किया है। एक ही वित्तीय वर्ष में लगभग 6 लाख ग्रामीण आवासों का निर्माण कर राज्य ने नया रिकॉर्ड बनाया है, जो अब तक किसी अन्य राज्य ने हासिल नहीं किया।
सरकार की दलील पर उठे सवाल
MGNREGA HR Policy : प्रमुख सचिव स्तर पर यह तर्क दिया गया कि मनरेगा एक केंद्र प्रायोजित योजना है, इसलिए राज्य स्तर पर अलग एचआर पॉलिसी बनाना चुनौतीपूर्ण है। हालांकि, महासंघ ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि अन्य केंद्र प्रायोजित योजनाओं में भी राज्य स्तर पर नीतियां बनाई गई हैं।
उपमुख्यमंत्री से मुलाकात का असर
MGNREGA HR Policy : उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस मुद्दे की गंभीरता को स्वीकार किया है। उन्होंने अपने ओएसडी को एचआर पॉलिसी से संबंधित आवश्यक निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही रोजगार सहायकों के संविदा से जुड़े मुद्दों पर भी उचित परीक्षण का आश्वासन दिया गया है।

बड़ी संख्या में कर्मचारी रहे मौजूद
MGNREGA HR Policy : इस बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ के प्रांतीय पदाधिकारी और कबीरधाम जिले से बड़ी संख्या में मनरेगा कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने एकजुट होकर अपनी मांगों को सरकार के सामने रखा।
समाधान की ओर बढ़ेगा मामला?
MGNREGA HR Policy : फिलहाल कर्मचारियों को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी और लंबित एचआर पॉलिसी को लागू करेगी। यदि ऐसा होता है, तो इससे हजारों कर्मचारियों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी। वहीं यदि देरी जारी रहती है, तो आने वाले समय में आंदोलन की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
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