Manpur Kisan Suicide News: किसान आत्महत्या मामले में सियासी घमासान, कांग्रेस ने बनाई 9 सदस्यीय जांच समिति
Manpur Kisan Suicide News: छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के बोहरनेडी गांव में किसान की आत्महत्या के मामले ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने एक उच्चस्तरीय जांच समिति के गठन की घोषणा की है। कांग्रेस ने साफ किया है कि जांच पूरी होने के बाद समिति अपनी रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कमेटी को सौंपेगी।
किसान आत्महत्या मामले में कांग्रेस की जांच कमेटी
कांग्रेस द्वारा गठित 9 सदस्यीय जांच समिति में विधायक इंद्रशाह मंडावी को संयोजक बनाया गया है। इस समिति में कांग्रेस के 5 विधायक, एक पूर्व विधायक और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला कांग्रेस अध्यक्ष को शामिल किया गया है। पार्टी का कहना है कि समिति तत्काल प्रभाव से मामले की जांच शुरू करेगी और जमीनी हकीकत सामने लाएगी

किसान आत्महत्या पर अलग-अलग दावे
बोहरनेडी गांव में किसान द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने के बाद कांग्रेस और प्रशासन के बयान आमने-सामने आ गए हैं। कांग्रेस जहां इस घटना को धान खरीदी व्यवस्था की विफलता से जोड़ रही है, वहीं प्रशासन आत्महत्या का कारण मानसिक तनाव और आर्थिक दबाव बता रहा है।

कांग्रेस का आरोप: धान नहीं बिकने से टूटा किसान
प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि किसान का टोकन कटने के बावजूद धान खरीदी केंद्र में धान नहीं लिया गया, जिससे वह मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गया। कांग्रेस का आरोप है कि धान खरीदी व्यवस्था में अव्यवस्था के कारण किसान ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। पार्टी ने सरकार से धान खरीदी की तारीख बढ़ाने और व्यवस्था में सुधार की मांग की है।
प्रशासन का पक्ष: आत्महत्या का धान खरीदी से संबंध नहीं
वहीं प्रशासन ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस जांच और पंचनामे में सामने आया है कि किसान लंबे समय से मानसिक तनाव में था और ट्रैक्टर की किस्त नहीं चुका पाने के कारण परेशान था। प्रशासन का दावा है कि आत्महत्या का धान खरीदी केंद्र से कोई सीधा संबंध नहीं है।
प्रशासन के अनुसार, किसान एमएमसी का निवासी था और वह पहले ही लगभग 3 लाख रुपये का धान बेच चुका था। जिस खेत में धान बोया गया था, वह किसान की मां के नाम पंजीकृत था और खेत के एवज में 60 हजार रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका था। यह तथ्य वीडियो बयान और पंचनामे में दर्ज हैं।
किसान के भाई का लिखित बयान
पुलिस ने बताया कि किसान के भाई ने लिखित बयान देकर आत्महत्या को धान खरीदी से जोड़ने से इनकार किया है। पंचनामे में गांव के सरपंच और ग्रामीणों के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। प्रशासन का कहना है कि किसान शराब का आदी था और मानसिक तनाव में रहता था।
प्रशासन के अनुसार, किसान घटना वाले दिन दोपहर में घर से निकला था, जबकि आत्महत्या की जानकारी शाम को सामने आई, जिससे तत्काल किसी धान खरीदी विवाद से आत्महत्या का सीधा संबंध साबित नहीं होता।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
अब पूरे मामले में कांग्रेस की जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट सामने आने के बाद किसान आत्महत्या को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।
