रामअवतार जग्गी हत्याकांड में बड़ा फैसला: अमित जोगी को उम्रकैद
अमित जोगी को उम्रकैद
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में बिलासपुर हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। निचली अदालत के पूर्व निर्णय को निरस्त करते हुए कोर्ट ने मुख्य आरोपी अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में छह महीने की अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी।
डिवीजन बेंच का विस्तृत फैसला
करीब 78 पन्नों में जारी इस फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अमित जोगी को आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी पाया गया है। सीबीआई द्वारा दायर अपील को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने सतीश जग्गी की पुनरीक्षण याचिका को निष्प्रभावी मानते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि पहले ही अन्य आरोपियों की सजा को बरकरार रखा जा चुका है।
तीन हफ्ते में करना होगा सरेंडर
फैसले के अनुसार, अमित जोगी फिलहाल जमानत पर हैं और उनकी जमानत तीन सप्ताह तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान उन्हें संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें हिरासत में लेकर सजा पूरी करने के लिए जेल भेजा जाएगा। साथ ही कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि फैसले की प्रति आरोपी को भेजी जाए और उन्हें सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के अधिकार की जानकारी दी जाए।
हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी
डिवीजन बेंच ने अपने निर्णय में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि जब सभी आरोपियों पर एक समान साक्ष्य के आधार पर आरोप हों, तो किसी एक आरोपी को अलग आधार पर बरी करना उचित नहीं है। जब तक किसी आरोपी के पक्ष में स्पष्ट और ठोस आधार न हो, तब तक भेदभाव नहीं किया जा सकता।
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद खुला रास्ता
इस मामले में पहले हाई कोर्ट ने सीबीआई और सतीश जग्गी की याचिकाएं खारिज कर दी थीं। इसके बाद दोनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने 6 नवंबर 2025 को सुनवाई करते हुए देरी को माफ किया और मामले को पुनर्विचार के लिए बिलासपुर हाई कोर्ट वापस भेज दिया। साथ ही निर्देश दिया कि सीबीआई, शिकायतकर्ता और राज्य सरकार को पक्षकार बनाया जाए।
2003 में हुई थी हत्या
4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। बाद में दो आरोपी सरकारी गवाह बन गए थे। पहले अधिकांश आरोपियों को दोषी ठहराया गया, लेकिन अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।
कौन थे रामअवतार जग्गी
रामअवतार जग्गी एक कारोबारी पृष्ठभूमि के नेता थे और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे। जब शुक्ल एनसीपी में शामिल हुए, तो जग्गी भी उनके साथ पार्टी में आए और उन्हें छत्तीसगढ़ में पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया था। इस हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश त्रिवेदी समेत कई अन्य आरोपियों को भी दोषी ठहराया जा चुका है।
