Maharashtra New Deputy CM: महाराष्ट्र की राजनीति में नया अध्याय, सुनेत्रा पवार बन सकती हैं पहली महिला डिप्टी सीएम

Maharashtra New Deputy CM: महाराष्ट्र की राजनीति में महिलाओं की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है और इसी कड़ी में सुनेत्रा पवार का नाम तेजी से उभर रहा है। सत्ता के केंद्र में उनकी मौजूदगी ने यह संकेत दे दिया है कि राज्य की सियासत में जल्द ही एक नया इतिहास रचा जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र में अब तक की सबसे ताकतवर महिला नेतृत्वकर्ताओं में शुमार होंगी।

सुनेत्रा पवार केवल एक सांसद भर नहीं हैं, बल्कि वे वर्षों तक उस “हाई टेबल” का हिस्सा रही हैं, जहां महाराष्ट्र और देश से जुड़े बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक फैसले लिए जाते रहे हैं। सत्ता के गलियारों में उनकी समझ, राजनीतिक संतुलन और पारिवारिक विरासत उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान देती है।

महाराष्ट्र में महिला नेतृत्व की मजबूत परंपरा

महाराष्ट्र की राजनीति में पहले भी कई प्रभावशाली महिला नेता रही हैं। अदिति तटकरे महायुति सरकार में कैबिनेट मंत्री रहीं और हाल के वर्षों में एक प्रमुख महिला चेहरा बनकर उभरीं। पंकजा मुंडे ने भाजपा-शिवसेना सरकार में ग्रामीण विकास जैसे अहम विभाग की जिम्मेदारी संभाली। वर्षा गायकवाड़, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री, वर्तमान में मुंबई कांग्रेस की अध्यक्ष हैं। नीलम गोरे लंबे समय से महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति के गरिमामयी पद पर हैं।

सुप्रिया सुले, एनसीपी (शरद पवार गुट) की कार्यकारी अध्यक्ष और लोकसभा की प्रभावशाली सांसद, राज्य की सबसे ताकतवर महिला नेताओं में गिनी जाती हैं।

मृणाल गोरे, जिन्हें ‘पानी वाली बाई’ कहा जाता है, विपक्ष की एक सशक्त आवाज रही हैं।

विमल मुंदड़ा और प्रभा राव भी अतीत में राज्य सरकार में अहम मंत्रालयों का नेतृत्व कर चुकी हैं।

सुनेत्रा पवार के सामने चुनौतियां

सुनेत्रा पवार की सबसे बड़ी ताकत उनकी पार्टी के भीतर मजबूत स्वीकार्यता और भरोसा है। उनके पास राजनीतिक विरासत, सामाजिक कार्यों का अनुभव और सत्ता के संचालन की गहरी समझ है। हालांकि, अजित पवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें केवल नीतिगत समझ ही नहीं, बल्कि आक्रामक राजनीतिक रणनीति और प्रशासनिक नेतृत्व में भी खुद को साबित करना होगा।

भले ही सक्रिय राजनीति में उनका अनुभव पारंपरिक अर्थों में ज्यादा आक्रामक न माना जाए, लेकिन सत्ता और नीति-निर्माण को बेहद करीब से देखने का उनका अनुभव उन्हें एक अलग ही स्तर पर खड़ा करता है।

विरासत में मिली राजनीति

1963 में उस्मानाबाद (अब धाराशिव) में जन्मीं सुनेत्रा पवार एक मराठा परिवार से आती हैं, जिसकी स्थानीय राजनीति में गहरी पकड़ रही है। उनके पिता बाजीराव पाटिल क्षेत्रीय स्तर पर सक्रिय राजनीतिक शख्सियत थे, जबकि उनके भाई पद्मसिंह बाजीराव पाटिल 1980 के दशक में जिले की राजनीति के प्रभावशाली नेता रहे।

पवार परिवार में विवाह से पहले ही सुनेत्रा पवार का पालन-पोषण ऐसे माहौल में हुआ, जहां राजनीति और सार्वजनिक जीवन रोजमर्रा की चर्चा का विषय था। यही वजह है कि आज वे सत्ता की जटिलताओं को न केवल समझती हैं, बल्कि उन्हें साधने की क्षमता भी रखती हैं।

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