महाकाल सवारी: रजत पालकी में चंद्रमौलेश्वर और हाथी पर मनमहेश स्वरूप में निकले बाबा महाकाल, उमड़ा आस्था का समंदर

उज्जैन। पवित्र श्रावण मास के दूसरे सोमवार को धर्मनगरी उज्जैन में राजाधिराज भगवान महाकालेश्वर की दूसरी भव्य सवारी पूरी आन-बान-शान और धार्मिक उत्साह के साथ निकाली गई। अनादि काल से चली आ रही परंपरा के अनुसार, बाबा महाकाल चांदी की पालकी में सवार होकर अपनी प्रजा का हाल-चाल जानने नगर भ्रमण पर निकले। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा के दिव्य चंद्रमौलेश्वर स्वरूप और हाथी पर विराजमान मनमहेश स्वरूप के दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया।

पूजन-अर्चना के बाद दिया गया ‘गार्ड ऑफ ऑनर’

सवारी निकलने से पूर्व महाकालेश्वर मंदिर के ऐतिहासिक सभा मंडप में भगवान महाकाल का पूर्ण विधि-विधान से पूजन-अर्चन और आरती की गई।

इस अवसर पर उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे। दोनों अधिकारियों ने विधि-विधान से पूजा के बाद बाबा की पालकी को कंधा देकर नगर भ्रमण के लिए रवाना किया।

जैसे ही पालकी मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची, वहां तैनात सशस्त्र पुलिस दल की टुकड़ी द्वारा भगवान महाकाल को बाकायदा ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया।

इन प्रमुख मार्गों से गुजरी महाकाल की सवारी

शाही ठाट-बाट के साथ निकली यह सवारी मंदिर प्रांगण से शुरू होकर महाकाल घाटी, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और हरसिद्धि पाल होते हुए प्रसिद्ध रामघाट पहुंची।

रामघाट पहुंचने पर मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के जल से भगवान महाकाल का विधि-विधान से जलाभिषेक व पूजन किया गया। इसके पश्चात सवारी गणगौर दरवाजा, ढाबा रोड, गोपाल मंदिर और पटनी बाजार से होते हुए पुनः महाकालेश्वर मंदिर वापस पहुंची।

भजन मंडलियां और पुलिस बैंड बने आकर्षण का केंद्र

बाबा महाकाल के स्वागत में पूरी अवंतिका नगरी दुल्हन की तरह सजी नजर आई। भक्तों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर अपने राजा का स्वागत किया।

सवारी के कारवां में पुलिस का अश्वरोही दल, सशस्त्र पुलिस बल, पुलिस बैंड की मधुर धुनें और शंखनाद करती भजन मंडलियां शामिल रहीं, जिससे पूरा मार्ग ‘जय श्री महाकाल’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।

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