कहीं सड़क हो गई चोरी तो कहीं जमीन धंसकर खुला पाताल का रास्ता… निर्माण में फूंके करोड़ों, गड़बड़ सारा बही-खाता
मध्य प्रदेश में सड़क निर्माण पर हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन गुणवत्ता शून्य और भ्रष्टाचार की चैन चल रही है। CAG रिपोर्ट से लेकर आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के खुलासे और मंत्री के पैर तले उखड़ती सड़कों तक पिछले तीन साल (2023-2026) में राज्य की सड़कें घोटालों, फर्जी बिलों और घटिया निर्माण की मिसाल बन गई हैं। लाखों टैक्सपेयर्स का पैसा बर्बाद, दुर्घटनाएं बढ़ीं और जनता का भरोसा टूटा। यह है एमपी के सड़क घोटाले का पूरा तीन साल का सच।
CAG का 415 करोड़ का बिटुमन घोटाला खुलासा
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की 2025 में पेश रिपोर्ट ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) में भारी अनियमितताएं उजागर कीं। 2021-22 की ऑडिट में 49 जिलों के 71 प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन यूनिट्स (PIUs) में ठेकेदारों ने फर्जी और डुप्लिकेट बिल जमा कर 414.94 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा किया। सरकारी रिफाइनरी के फर्जी इनवॉइस, एक ही बिल कई बार इस्तेमाल, प्राइवेट रिफाइनरी से सस्ता बिटुमन खरीदकर महंगा दिखाना ये सब आम था। विभाग ने इनवॉइस चेक करने का कोई सिस्टम नहीं बनाया। नतीजा? ग्रामीण सड़कें घटिया बनीं, बारिश में धंस गईं और लाखों किलोमीटर की कनेक्टिविटी पर सवाल खड़े हो गए। ब्लैकलिस्टेड ठेकेदारों को भी काम दिए जाने का आरोप लगा।
37 करोड़ का MPRDC फर्जी बिल घोटाला
जनवरी 2025 में EOW ने मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) में बड़ा खुलासा किया। पांच ठेकेदारों (AD Construction जबलपुर, विश्वकुसुम इंफ्राटेक, वैष्णव एसोसिएट्स आदि) ने इंडियन ऑयल, HPCL, BPCL जैसी कंपनियों के फर्जी बिल जमा कर 37 करोड़ रुपये निकाल लिए। असल में बिटुमन खरीदा ही नहीं गया, लेकिन 20+ परियोजनाओं में भुगतान हो गया। EOW ने सभी के खिलाफ FIR दर्ज की। इसी साल छतरपुर में 1.81 करोड़ रुपये की 2.5 किमी नई डामर सड़क एक हफ्ते में उखड़ने लगी। ग्रामीणों ने हाथ से तोड़कर वीडियो वायरल किया, ठेकेदार के कर्मचारी पैचवर्क करने पहुंचे।
नर्मदापुरम में फार्महाउस फेवर, तीन अधिकारी सस्पेंड
अक्टूबर 2025 में NDB योजना के तहत सेमरी-हरचंद से गजनई सड़क में 350 मीटर हिस्सा पूर्व चीफ इंजीनियर जीपी मेहरा के फार्महाउस तक मोड़ दिया गया। अलाइनमेंट बदलने में गंभीर लापरवाही, तीन इंजीनियर सस्पेंड।
सतना में मंत्री के पैर तले सड़क उखड़ी
शहरी विकास राज्य मंत्री प्रतिभा बागरी जब रायगांव में नई सड़क (पोड़ी-मनखारी) का निरीक्षण करने गईं, तो उनके एक कदम से डामर उखड़ गया। मंत्री ने ठेकेदार राजेश कुमार कैला का लाइसेंस एक साल के लिए रद्द कर दिया और सख्त कार्रवाई के आदेश दिए। वीडियो वायरल हो गया।
जबलपुर में 400 करोड़ का रेलवे ओवरब्रिज 3 साल में ढहा
NH-45 (जबलपुर-भोपाल) पर शाहपुरा के पास 400 करोड़ रुपये की परियोजना का रेलवे ओवरब्रिज महज तीन साल पुराना था। मरम्मत के दौरान हिस्सा ढह गया, ट्रैफिक डायवर्ट। पहले भी हिस्सा गिर चुका था। खराब इंजीनियरिंग और घटिया निर्माण का आरोप। साथ ही, जबलपुर में सिमरिया-छापरी सड़क को ‘कागजों पर बनाकर’ भ्रष्टाचार का मामला हाईकोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने हलफनामा मांगा।
जबलपुर में ‘6 किमी सड़क चोरी’
फरवरी 2026 में जबलपुर जिले के कटंगी तहसील के सिमरिया-छापरी गांव की 6 किमी सड़क (PMGSY के तहत 2018 में स्वीकृत) का भयानक घोटाला सामने आया। सड़क कागजों पर 2022 में पूरी दिखाई गई, फंड जारी और निकाल लिया गया, लेकिन जमीन पर कहीं डामर-गिट्टी तक नहीं। बोर्ड गलत जगह लगा दिया गया ताकि फोटो खिंच सके। ग्रामीणों ने इसे ‘सड़क चोरी हो गई’ कहा।
ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। विधायक, सांसद, मंत्री, मध्य प्रदेश सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय तक भ्रष्टाचार की शिकायती पत्र भेजे। लेकिन किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की। सड़क आज तक नहीं बनी। ग्रामीण बारिश में कीचड़ में फंसते रहे, बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाते, एम्बुलेंस नहीं आ पाती।
कार्रवाई न होने पर सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर रामकुमार पटेल (बरखेड़ा निवासी) ने एडवोकेट दिनेश उपाध्याय की मदद से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (जबलपुर बेंच) में जनहित याचिका दायर की।
कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि इसमें मध्य प्रदेश सरकार, प्रधानमंत्री सड़क निर्माण के अधिकारी अपना जवाब पेश करें.
नुकसान का आंकड़ा
तीन साल में राज्य बजट में सड़क-पुल निर्माण पर 10,000 करोड़ से ज्यादा का प्रावधान (2024-25 में 3500 किमी नई सड़कें, 70 पुल लक्ष्य) रहा, केंद्र से 4000 करोड़ से अधिक की अतिरिक्त परियोजनाएं मंजूर। लेकिन CAG, EOW और घटनाओं से सैकड़ों करोड़ का सीधा नुकसान, हजारों करोड़ का अप्रत्यक्ष (बार-बार मरम्मत, दुर्घटनाएं)। भोपाल, बड़वानी, उज्जैन, श्योपुर में भी नई सड़कें दरारें लेकर आईं। पोटहोल्स से सड़क दुर्घटनाओं में सैकड़ों मौतें।
जनता और विपक्ष चुप नहीं
कांग्रेस ने ‘भ्रष्टाचार धंस रहा है’ पोस्टर लगाए, जबकि सरकार पुरानी सड़कों का हवाला दे रही है। हाईकोर्ट ने सड़कों की खराब स्थिति पर संज्ञान लिया। ठेकेदारों पर कार्रवाई हो रही है, लेकिन सिस्टम में सुधार की मांग तो होनी ही है।
मध्य प्रदेश की सड़कें विकास की रीढ़ हैं, लेकिन तीन साल के इन घोटालों ने साबित कर दिया पैसा खर्च होता है, लेकिन गुणवत्ता और जवाबदेही गायब। क्या अब कोई बड़ा सुधार आएगा? जनता इंतजार कर रही है।
