प्याज की कीमत धड़ाम.. किसानों की हालत बदतर, 1 रुपये किलो बिक रहा प्याज! सड़क पर फेंकी उपज 

रतलाम/मंदसौर। मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट ने किसानों को आर्थिक संकट में धकेल दिया है। लागत से भी कम दाम मिलने से त्रस्त किसान सड़कों पर उतर आए हैं। रतलाम की सैलाना मंडी में गुस्साए किसानों ने प्याज से भरी ट्रॉलियां सड़क पर उड़ेल दीं, जबकि मंदसौर के धमनार गांव में प्रतीकात्मक विरोध के तहत ‘प्याज की शवयात्रा’ निकालकर अंतिम संस्कार किया। किसानों का आरोप है कि 25% निर्यात शुल्क के कारण निर्यात ठप होने से घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ गई और भाव धड़ाम हो गए।

रतलाम में उबल पड़ा किसानों का गुस्सा

शुक्रवार सुबह रतलाम की सैलाना कृषि उपज मंडी में प्याज के दाम 1-2 रुपये प्रति किलो तक लुढ़क गए। इससे भड़के किसानों ने बिक्री का बहिष्कार कर दिया और मंडी गेट पर ट्रॉलियां खाली कर सड़क पर प्याज के ढेर लगा दिए। इससे सड़क जाम हो गई और ट्रैफिक ठप। किसान एलम सिंह परमार ने कहा, “लागत 10-12 रुपये प्रति किलो है, लेकिन मंडी में 2 रुपये भी नहीं मिल रहे। घर ले जाने का खर्चा क्यों करें? बेहतर है फसल नष्ट हो जाए।” एक ने बताया कि उन्होंने 4 रुपये किलो में बेचा, लेकिन दवाओं का खर्च भी नहीं निकला।

कांग्रेस ने इसे केंद्र सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर कहा, “मध्य प्रदेश में प्याज किसान खून के आंसू रो रहे हैं। पीएम मोदी ने बर्बाद कर दिया।”

मंदसौर में प्याज का ‘अंतिम संस्कार’

मंदसौर के धमनार क्षेत्र में किसानों ने भावुक विरोध प्रदर्शन किया। बैंड-बाजों के साथ फूलों से सजी प्याज की अर्थी शिव मंदिर से श्मशान घाट ले जाई गई। विधि-विधान से मुखाग्नि देकर प्याज को पंचतत्व में विलीन किया। किसान अचल सिंह मेवाड़ा ने कहा, “50 पैसे किलो में बिकी फसल! किराए का वाहन भी नहीं चुका पाए। जैसे मृतक की शांति के लिए संस्कार करते हैं, वैसे ही उम्मीद है कि अगले साल दाम सुधरें।” वीडियो वायरल होने से मामला पूरे देश में चर्चा में आ गया।

किसानों की मांग है कि प्याज पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू हो, निर्यात शुल्क हटे और बिचौलियों पर अंकुश लगे। बब्बू मालवी जैसे किसान बोले, “एक बीघा में 6-7 क्विंटल उपज, लेकिन नुकसान ही हुआ।”

 

क्यों गिरे प्याज के भाव?

निर्यात शुल्क का असर- 25% शुल्क से भारतीय प्याज का निर्यात रुक गया, आपूर्ति बढ़ी।

अधिक पैदावार- मालवा (रतलाम, मंदसौर, नीमच) में अच्छी फसल, लेकिन मांग कम।

मंडी भाव- कई मंडियों में 1-10 रुपये/किलो, जबकि लागत 10-12 रुपये। अकोदिया मंडी में 7 से गिरकर 4.50 रुपये हो गया।

किसान संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने MSP घोषित नहीं किया तो बड़े आंदोलन होंगे। राज्य सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन किसान राहत पैकेज की मांग तेज हो गई है। यह संकट न सिर्फ मध्यप्रदेश, बल्कि महाराष्ट्र के किसानों को भी प्रभावित कर रहा है।

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