नक्सल प्रभाव घटते ही विकास की मांग तेज, 18 पंचायतों के ग्रामीणों का चक्काजाम

कांकेर। एक समय नक्सल प्रभाव के कारण अतिसंवेदनशील रहे कोयलीबेड़ा क्षेत्र में अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। जहां कभी नक्सलियों के कारण विकास कार्य ठप पड़े रहते थे, वहीं अब नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के साथ ग्रामीण विकास की मांग को लेकर एकजुट होकर सड़कों पर उतर आए हैं।

कोयलीबेड़ा क्षेत्र की 18 ग्राम पंचायतों के 68 गांवों के ग्रामीणों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और प्रशासनिक सुविधाओं सहित पांच सूत्रीय मांगों को लेकर चक्काजाम और धरना प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से वे बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं और अब जब क्षेत्र में शांति स्थापित हो रही है, तो उन्हें विकास का अधिकार मिलना चाहिए।

ब्लॉक मुख्यालय में अधिकारी नहीं बैठने से परेशानी

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कोयलीबेड़ा ब्लॉक मुख्यालय होने के बावजूद यहां अधिकारी नियमित रूप से नहीं बैठते। सभी प्रमुख कार्यालय और अधिकारी लगभग 50 किलोमीटर दूर पखांजूर से संचालित हो रहे हैं। इससे लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। कई बार मांग उठाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव

क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। स्कूल भवन जर्जर हैं और लंबे समय से महाविद्यालय की मांग लंबित है। बारहवीं कक्षा के बाद विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई के लिए 50 किलोमीटर दूर भानुप्रतापपुर जाना पड़ता है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कई छात्र पढ़ाई बीच में ही छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।

स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। अस्पतालों में महिला डॉक्टर सहित विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। एकमात्र एम्बुलेंस पर्याप्त नहीं है और आवश्यक उपकरणों का अभाव बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में सुविधाएं उपलब्ध दर्शाई जाती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है।

किसानों को भुगतान के लिए 50 किमी की दूरी

क्षेत्र के अधिकांश लोग कृषि पर निर्भर हैं। सरकारी योजनाओं के तहत धान बेचने के बाद भुगतान के लिए किसानों को 50 किलोमीटर दूर भानुप्रतापपुर जाना पड़ता है, जहां सप्ताह में केवल बुधवार को भुगतान किया जाता है। कई बार भुगतान नहीं होने पर किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ता है। लंबे समय से सहकारी बैंक खोलने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

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