Justice Yashwant Varma Resignation : “जले नोटों का राज और अचानक इस्तीफा…” Justice Varma के फैसले से थमी महाभियोग प्रक्रिया, पूरा मामला जानिए

Justice Yashwant Varma Resignation

Justice Yashwant Varma के Resign के बाद महाभियोग प्रक्रिया खत्म। जले नोटों के कैश विवाद से जुड़ा पूरा मामला जानिए।

Justice Yashwant Varma Resignation : Justice Yashwant Varma ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पिछले एक साल से विवादों में रहे जस्टिस वर्मा ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर तत्काल प्रभाव से पद छोड़ने की घोषणा की, जिससे देशभर में हलचल मच गई है।

 

Justice Yashwant Varma Resignation : राष्ट्रपति को भेजा पत्र

जस्टिस वर्मा ने Droupadi Murmu को भेजे पत्र में कहा कि वे भारी मन से यह फैसला ले रहे हैं। उन्होंने इस्तीफे के कारणों का विस्तार से खुलासा नहीं किया, लेकिन इसे व्यक्तिगत निर्णय बताया।

 

CJI को भी दी जानकारी

इस्तीफे की जानकारी उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant को भी दी। इससे यह स्पष्ट हो गया कि यह निर्णय पूरी प्रक्रिया के तहत लिया गया है।

 

महाभियोग प्रक्रिया पर लगा विराम

उनके इस्तीफे का सबसे बड़ा असर यह हुआ कि उनके खिलाफ चल रही महाभियोग प्रक्रिया अब समाप्त मानी जा रही है। नियमों के अनुसार, जज के पद छोड़ते ही यह प्रक्रिया अपने आप खत्म हो जाती है।

 

क्या कहता है कानून

जजेस (इन्क्वायरी) एक्ट 1968 के तहत अगर कोई जज पद पर नहीं रहता, तो उसके खिलाफ संसद में चल रही हटाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती। ऐसे में अब यह मामला कानूनी रूप से यहीं थम जाएगा।

 

 विवाद की शुरुआत: 14 मार्च 2025 की आग की घटना

पूरा मामला 14 मार्च 2025 की रात शुरू हुआ। उस समय जस्टिस यशवंत वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश थे। उनके लुटियंस दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास (30 तुगलक क्रिसेंट) में आग लग गई। आग बुझाने पहुंची दिल्ली फायर सर्विस की टीम और पुलिस अधिकारियों ने एक आउटहाउस (स्टोर रूम) में भारी मात्रा में नकदी देखी। वहां ₹500 के जले हुए और अधजले नोटों के बंडल बिखरे पड़े थे।

कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, बरामद नकदी की अनुमानित राशि करीब 15 करोड़ रुपये थी, हालांकि आधिकारिक रूप से यह आंकड़ा पुष्टि नहीं हुआ। फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने घटनास्थल का वीडियो भी रिकॉर्ड किया, जिसमें “महात्मा गांधी में आग लग रही है” जैसी आवाजें सुनाई दीं। यह वीडियो बाद में वायरल हो गया और मामले को नया मोड़ दे गया।

घटना के समय जस्टिस वर्मा और उनकी पत्नी भोपाल में थे। उन्होंने तुरंत घटनास्थल का निरीक्षण नहीं किया और न ही इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को दी, जिसे बाद में जांच समितियों ने उनके खिलाफ सबूत के रूप में लिया।

 

 उस समय घर पर नहीं थे जज

घटना के समय Justice Yashwant Varma और उनकी पत्नी Bhopal में मौजूद थे। इसके बावजूद इस मामले ने तूल पकड़ लिया और जांच की मांग तेज हो गई।

 

 संसद में शुरू हुई थी कार्रवाई

अगस्त 2025 में लोकसभा में Justice Yashwant Varma खिलाफ प्रस्ताव लाया गया, जिसे स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था।

 

जांच अधूरी ही रह गई

इस समिति को आरोपों की जांच कर रिपोर्ट देनी थी, लेकिन इस्तीफे के बाद अब यह पूरी प्रक्रिया अधूरी ही समाप्त हो जाएगी। इससे कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

 

आगे क्या होगा

जले नोटों का यह मामला मार्च 2025 से अप्रैल 2026 तक चला और अंत में इस्तीफे के साथ समाप्त हो गया। यह घटना न केवल जस्टिस वर्मा के करियर को प्रभावित कर गई, बल्कि पूरे न्यायिक तंत्र की विश्वसनीयता पर भी असर डाला।

अब सवाल यह है कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

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