‘मोदी-शाह की कब्र खुदेगी’, JNU में लगे पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक नारे… छात्रों पर FIR
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) एक बार फिर सुर्खियों में है। सोमवार शाम को सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2020 दिल्ली दंगा साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत खारिज करने के फैसले के विरोध में छात्रों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक और विवादास्पद नारे लगाए गए। जेएनयू प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए तुरंत एफआईआर दर्ज कराई है और दोषी छात्रों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
क्या हुआ था सोमवार शाम को?
सुप्रीम कोर्ट ने 6 जनवरी 2026 को 2020 दिल्ली दंगों की कथित ‘बड़ी साजिश’ मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। दोनों आरोपी पिछले पांच साल से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में हैं। इस फैसले के तुरंत बाद जेएनयू के साबरमती हॉस्टल इलाके में लेफ्ट-समर्थित छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अश्लील और राष्ट्रविरोधी माने जाने वाले नारे लगाए।
ये नारे वायरल वीडियो में स्पष्ट रूप से सुनाई दे रहे हैं। वीडियो में जेएनयूएसयू जॉइंट सेक्रेटरी और आइसा की सदस्य दानिश अली, जेएनयूएसयू जनरल सेक्रेटरी और डीएसएफ के सदस्य सुनील यादव, कलेक्टिव पार्टी मेंबर गौरी, अदिति मिश्रा, गोपिका बाबू, साद अज़मी, महबूब इलाही, कनिष्क, पाकीजा खान, शुभम सहित अन्य छात्र शामिल दिख रहे हैं। नारेबाजी मुख्य रूप से गौरी और कुछ अन्य छात्रों द्वारा की गई।
जेएनयू प्रशासन का सख्त बयान
मंगलवार सुबह जेएनयू प्रशासन ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर आधिकारिक बयान जारी किया। बयान में कहा गया, “जेएनयू प्रशासन ने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह के विरुद्ध आपत्तिजनक नारे लगाने वाले छात्रों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने का वचन दिया है। इस मामले में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।”
प्रशासन ने आगे लिखा, “विश्वविद्यालय नवाचार और नए विचारों के केंद्र हैं और इन्हें घृणा फैलाने की प्रयोगशाला में परिवर्तित होने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है।”
लेकिन बयान में यह भी स्पष्ट किया गया, “भले ही छात्रों को बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत मौलिक अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन किसी भी प्रकार की हिंसा, गैरकानूनी आचरण या राष्ट्रविरोधी गतिविधि को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस घटना में शामिल सभी दोषी छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी, जिसमें तत्काल निलंबन, निष्कासन और विश्वविद्यालय से स्थायी रूप से प्रतिबंधित करना शामिल है।”
मुख्य सुरक्षा अधिकारी की रिपोर्ट: सोची-समझी साजिश
जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में इस नारेबाजी को “जानबूझकर और सोची-समझी रणनीति” करार दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये नारे बार-बार और साफ सुनाई दे रहे थे, जो यह दर्शाता है कि यह सहज विरोध नहीं था, बल्कि परिसर में सद्भाव, सार्वजनिक व्यवस्था और विश्वविद्यालय के शांतिपूर्ण अकादमिक चरित्र को जानबूझकर बाधित करने का प्रयास था।
प्रशासन ने विश्वविद्यालय की सुरक्षा शाखा को पुलिस जांच में पूर्ण सहयोग करने का निर्देश दिया है।
बीजेपी ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा, “यह एक बड़ी साजिश है। न्यूयॉर्क का मेयर उमर खालिद के साथ है, आप के नेता फैसले के खिलाफ ट्वीट कर रहे थे। कन्हैया के साथ इन्होंने चुनाव लड़ा है। ऐसे नारे देशद्रोह जैसे हैं। सांपों के फन कुचले जा रहे हैं तो सपोले बिलबिला रहे हैं।”
बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने कहा, “जो इस प्रकार के देश विरोधी, धर्म विरोधी नारे लगाते हैं, वे अफजल गुरु के लिए भी नारे लगाते हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ, आतंकियों-नक्सलियों के समर्थन में नारे लगाते हैं लेकिन इनके नारे बस नारे तक ही सीमित हैं। यह बस उनकी छटपटाहट है।”
दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, “जो भी अशांति फैलाएगा, वह जेल जाएगा। यह भाजपा का राज है, यहां अशांति फैलाने वालों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दंगा करने वालों की जगह जेल में है।”
बीजेपी नेता गिरिराज सिंह ने कहा, “जेएनयू टुकड़े-टुकड़े गैंग का ऑफिस बन गया है। मैं टुकड़े-टुकड़े गैंग से कहना चाहता हूं कि जो लोग उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे लोगों का समर्थन करते हैं, जिन्होंने पाकिस्तान समर्थक भावनाएं रखीं और चिकन नेक कॉरिडोर को अलग करने की बात की, वे देशद्रोही हैं।”
विपक्ष और छात्र संगठनों की सफाई
जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने सफाई देते हुए कहा कि ये विरोध किसी को टारगेट करके नहीं किया गया था। हर साल छात्र 5 जनवरी 2020 को कैंपस में हुई हिंसा की निंदा करने के लिए विरोध प्रदर्शन करते हैं। मिश्रा ने बताया कि विरोध प्रदर्शन में लगाए गए सभी नारे वैचारिक थे। ये नारे किसी पर व्यक्तिगत हमला नहीं थे।
लेफ्ट नेता और सीपीआई(एम) के हन्नान मोल्लाह ने कहा कि पिछले 50 सालों में देश में इस तरह के नारे 100 बार लगाए गए हैं। हालांकि इस तरह के नारे नहीं लगाए जाने चाहिए। नारे लगाते समय उन्हें बहुत सावधान रहना चाहिए।
आरजेडी सांसद और प्रोफेसर मनोज झा ने कहा, “आक्रोश की शब्दावली के पक्ष में नहीं हूं। मैं मुर्दाबाद के विरोध में भी हूं। शब्दों के विरोध में सेलेक्टिव नहीं होना चाहिए। बीजेपी विरोध कर रही है लेकिन उनके शब्दों का भी मैं विरोध करता हूं। देश की भाषा और शब्दावली देख लीजिए।”
कांग्रेस नेता उदित राज ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, “यह गुस्सा जाहिर करने का एक तरीका है। 2020 दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ गुस्सा है। उमर खालिद और शरजील इमाम साथ ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि वे मुसलमान हैं। उनके साथ नाइंसाफी हुई है। कोर्ट का फैसला बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।”
जेएनयू में अब तक क्या-क्या?
जेएनयू का इतिहास विवादों से भरा रहा है। यहां 10 मुख्य बिंदुओं में देखें,
- 2016 एफआईआर और ‘टुकड़े-टुकड़े’ विवाद – अफजल गुरु की फांसी की बरसी पर नारे लगाने के मामले में एफआईआर दर्ज हुई, जिसमें कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य आरोपी बने।
- 2019-20 फीस हाइक विरोध – फीस बढ़ोतरी के खिलाफ आंदोलन में हिंसा हुई, पुलिस कार्रवाई हुई।
- 2020 दिल्ली दंगा साजिश – जेएनयू छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम मुख्य आरोपी बने।
- 2022 में एबीवीपी-एआईएसएफ झड़प – छात्र संघ चुनाव के दौरान हिंसा।
- 2023 में कैंटीन विवाद – छात्रों और प्रशासन के बीच टकराव।
- 2024 में CAA-NRC विरोध – प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ टकराव।
- 2025 में फीस और हॉस्टल नियम – नई नीतियों के खिलाफ आंदोलन।
- 2026 में यह घटना – मोदी शाह के खिलाफ नारे, एफआईआर और सख्त कार्रवाई।
- वर्तमान में छात्र संगठन – आइसा, डीएसएफ, एसएफआई, एबीवीपी, एनएसयूआई सक्रिय।
- प्रशासन का रुख – हर बार अनुशासनात्मक कार्रवाई, निलंबन और पुलिस शिकायत।
विवाद क्यों?
जेएनयू में राजनीतिक गतिविधियां और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमेशा से विवाद का विषय रही हैं। एक तरफ छात्र संगठन इसे वैचारिक संघर्ष और लोकतंत्र का हिस्सा बताते हैं, वहीं सरकार और प्रशासन इसे अराजकता और राष्ट्रविरोधी गतिविधि मानते हैं। इस घटना ने एक बार फिर जेएनयू को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।
पुलिस जांच जारी है। दोषी छात्रों की पहचान हो चुकी है और विश्वविद्यालय में अनुशासनात्मक सुनवाई शुरू होने वाली है। यह घटना जेएनयू के छात्र आंदोलनों के इतिहास में एक और अध्याय जोड़ रही है।
