Iran Protest: ईरान में बवाल के बाद इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं बंद, सड़कों पर हजारों प्रदर्शनकारी

Iran Protest / तेहरान : ईरान में महंगाई, गिरती रियाल और आर्थिक संकट के खिलाफ पिछले दो हफ्तों से जारी विरोध प्रदर्शन गुरुवार (8 जनवरी) की रात को चरम पर पहुंच गए। ईरान से निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने लोगों से घरों से बाहर निकलकर इस्लामिक शासन के खिलाफ प्रदर्शन करने की अपील की, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारी अब खुलकर रेजा पहलवी के समर्थन में नारे लगा रहे हैं, जो 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से प्रतिबंधित रहा है।

रेजा पहलवी की अपील और प्रदर्शन की शुरुआत

अमेरिका में निर्वासित जीवन जी रहे क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने गुरुवार शाम एक वीडियो बयान जारी कर ईरानी जनता से अपील की। उन्होंने कहा, “ईरान पर दुनिया की नजरें हैं। सड़कों पर उतरें और एक होकर अपनी मांगों को जोर से उठाएं। मैं इस्लामिक रिपब्लिक, उसके सर्वोच्च नेता और रिवॉल्यूशनरी गार्ड को चेतावनी देता हूं कि दुनिया और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आप पर करीब से नजर रख रहे हैं। लोगों पर जुल्म का जवाब जरूर दिया जाएगा।”

रेजा पहलवी की अपील के तुरंत बाद शाम 8 बजे से ही तेहरान, इस्फहान, मशहद, तबरीज, शिराज समेत कम से कम 50 शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों ने “इस्लामिक रिपब्लिक मुर्दाबाद”, “पहलवी वापस आएंगे”, “शाह के समर्थन में आखिरी लड़ाई” और “रेजा पहलवी जिंदाबाद” जैसे नारे लगाए। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर शाह के समर्थन में नारे लगाए जा रहे हैं।

सरकार की सख्ती: आंसू गैस, गोलीबारी और इंटरनेट बंद

ईरानी सरकार ने हालात बेकाबू होते देख तुरंत सुरक्षाबलों को उतार दिया। रिवॉल्यूशनरी गार्ड (IRGC) और बासिज मिलिशिया ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले, रबर बुलेट्स और कुछ जगहों पर लाइव फायरिंग का इस्तेमाल किया। ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) के अनुसार, गुरुवार रात से अब तक हुई हिंसा में कम से कम 39 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,260 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है।

सरकार ने इंटरनेट सेवा लगभग पूरी तरह बंद कर दी है। इंटरनेट मॉनिटरिंग ग्रुप नेट ब्लॉक्स ने कहा कि कई सर्विस प्रोवाइडर्स में कनेक्टिविटी ठप हो गई है, जिससे देश के बड़े हिस्से ऑफलाइन हो गए हैं। टेलीफोन लाइनें भी कई इलाकों में काट दी गई हैं।

डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी लोगों का खुला समर्थन किया है। उन्होंने एक बयान में कहा, “ईरानी जनता की आवाज दबाने की कोशिश की गई तो हम नहीं छोड़ेंगे। हम दुनिया को देखने दे रहे हैं कि इस्लामिक रिपब्लिक कितना कमजोर हो चुका है। ईरानी लोगों की मदद के लिए हम हर संभव कदम उठाएंगे।”

ट्रंप के इस बयान को ईरानी प्रदर्शनकारियों ने सकारात्मक रूप से लिया है। 1979 की इस्लामिक क्रांति से ठीक पहले ईरान के तत्कालीन शाह मोहम्मद रेजा पहलवी अमेरिका भाग गए थे। उनके बेटे रेजा पहलवी अब भी अमेरिका में निर्वासित जीवन जी रहे हैं।

 

प्रदर्शन क्यों और कब शुरू हुए?

ईरान में महंगाई दर पिछले कुछ महीनों में 40% से ऊपर पहुंच चुकी है। रियाल की वैल्यू गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर है। खाद्य तेल, चावल, दूध और दवाइयों की कीमतें आसमान छू रही हैं। बेरोजगारी और आर्थिक संकट से तंग युवा और मध्यम वर्ग सड़कों पर उतर आए। शुरुआती प्रदर्शन महंगाई के खिलाफ थे, लेकिन अब यह इस्लामिक शासन के खिलाफ खुला विद्रोह बन चुका है।

 

विपक्षी नेता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

ईरान के निर्वासित विपक्षी नेता और मानवाधिकार संगठनों ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है। अमेरिका, ब्रिटेन और इजराइल ने ईरानी सरकार से हिंसा रोकने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने घटनाओं पर चिंता जताई है।

ईरान में क्या हो रहा है?

प्रदर्शन अब 50 से ज्यादा शहरों में फैल चुके हैं। तेहरान में सबसे ज्यादा उग्रता देखी जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर सरकारी इमारतों, बैंकों और पुलिस थानों पर पथराव किया है। सरकार ने कर्फ्यू जैसे हालात बना दिए हैं। इंटरनेट बंद होने से सूचनाएं सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

स्थिति बहुत नाजुक बनी हुई है। अगर प्रदर्शन और उग्र हुए तो ईरान में बड़ा राजनीतिक संकट पैदा हो सकता है। रेजा पहलवी की अपील ने प्रदर्शन को नया मोड़ दे दिया है, जहां लोग अब खुले तौर पर शाह के वापस आने की बात कर रहे हैं।

ईरान की यह स्थिति वैश्विक स्तर पर भी नजर रखी जा रही है, क्योंकि इससे क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ सकता है।

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