‘जम्मू-कश्मीर हमारा अभिन्न अंग, पाकिस्तान रोके अपनी आतंकी करतूतें’: OIC की टिप्पणी पर भारत का पलटवार
New Delhi, Sep 18 (ANI): MEA Spokesperson Randhir Jaiswal addresses a bi-weekly media briefing, in New Delhi on Friday. (ANI Video Grab)
नई दिल्ली। भारत ने इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) द्वारा जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह बेबुनियाद और गैर-जरूरी करार दिया है। बुधवार को विदेश मंत्रालय ने इस पर अत्यंत कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि ओआईसी के बयान पूरी तरह तथ्यों से परे और अनुचित हैं। इसके साथ ही भारत ने संगठन को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि वह पाकिस्तान के दुष्प्रचार का मंच बनने के बजाय उसे अपनी हरकतों से बाज आने और आतंकवाद पर लगाम लगाने की सलाह दे।
‘जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा, दोहराने से सच नहीं बदलेगा’
विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि तथाकथित ‘ओआईसी कॉन्टैक्ट ग्रुप’ के संयुक्त बयान में भारत के आंतरिक मामलों को लेकर जो टिप्पणियां की गई हैं, उन्हें देश पूरी तरह नकारता है। मंत्रालय ने दो-टूक शब्दों में कहा कि ओआईसी के पास ऐसे मामलों पर टिप्पणी करने का कोई कानूनी, नैतिक या राजनयिक अधिकार नहीं है, जो पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र-शासित प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा रहे हैं और रहेंगे। राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित होकर किसी भी झूठे प्रचार को बार-बार दोहराने से यह ऐतिहासिक और भौगोलिक सच्चाई कभी नहीं बदल सकती।
OIC की साख पर उठे गंभीर सवाल
भारत ने ओआईसी के रवैये पर कड़ा एतराज जताते हुए उसकी निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के एजेंडा-आधारित और भ्रामक बयानों का बार-बार समर्थन करने से खुद ओआईसी की साख कमजोर होती है और उसकी वैश्विक प्रासंगिकता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
पाकिस्तान को आत्म-मंथन करने की नसीहत
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ओआईसी को पाकिस्तान के मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार का साधन नहीं बनना चाहिए।
मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि ओआईसी के लिए बेहतर यही होगा कि वह पाकिस्तान को आत्म-मंथन करने की सलाह दे। संगठन को चाहिए कि वह इस्लामाबाद पर दबाव बनाए ताकि वह अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों से पनपने वाले और लगातार सक्रिय सीमा पार आतंकवाद के खतरे से निपटे। भारत ने यह भी याद दिलाया कि पाकिस्तान का आतंकवाद को प्रायोजित और समर्थन देने का पुराना और कलंकित इतिहास रहा है।
यूएनजीए के इतर आयोजित की गई थी बैठक
गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के इतर ओआईसी कॉन्टैक्ट ग्रुप की एक बैठक आयोजित की गई थी। इसी बैठक के दौरान इस समूह ने भारत के आंतरिक मामलों में अनावश्यक दखल देते हुए जम्मू-कश्मीर को लेकर बयानबाजी की थी, जिस पर भारत ने त्वरित और कड़ा कूटनीतिक प्रहार किया है।
