IDBI बैंक का निजीकरण तय, सरकार और LIC बेचेंगे अपनी हिस्सेदारी
केंद्र सरकार IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी की रणनीतिक बिक्री को अक्टूबर 2025 तक पूरा करने की तैयारी में है। सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) मिलकर बैंक की 60.72% हिस्सेदारी बेचने जा रहे हैं। यह कदम न केवल लंबे समय से लंबित विनिवेश प्रक्रिया को अंतिम रूप देगा, बल्कि बैंकिंग क्षेत्र में निजीकरण की दिशा में एक बड़ा बदलाव भी साबित हो सकता है।
अक्टूबर तक पूरा होगा सौदा, अंतिम चरण में प्रक्रिया
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, दो वरिष्ठ सरकारी सूत्रों ने पुष्टि की है कि IDBI बैंक में स्टेक सेल अक्टूबर तक पूरा हो जाएगा। अभी बिड प्रोसेस अपने अंतिम चरण में है और जल्द ही योग्य बोलीदाताओं से फाइनेंशियल बिड्स मंगाई जाएंगी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 9 जुलाई को हुई इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप (IMG) की बैठक में शेयर खरीद समझौते (SPA) के मसौदे पर चर्चा की गई, जिसमें बैंक की बिक्री शर्तें, प्रबंधन का हस्तांतरण और नियामकीय मंजूरियों के पहलुओं को शामिल किया गया है। अब यह मसौदा कोर ग्रुप ऑफ सेक्रेटरीज और फिर वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्री समूह के पास भेजा जाएगा।
सरकार और LIC की हिस्सेदारी
वर्तमान में:
- सरकार के पास IDBI बैंक में 30.48% हिस्सेदारी है
- जबकि LIC के पास 49.24% हिस्सेदारी है
इन दोनों की कुल 60.72% हिस्सेदारी को रणनीतिक निवेशकों को बेचा जाएगा। RBI ने 2019 में IDBI बैंक को निजी क्षेत्र का बैंक घोषित कर दिया था, लेकिन अब तक बैंक पर नियंत्रण सरकार और LIC के पास ही बना हुआ है।
बैंकिंग सेक्टर में ऐतिहासिक निजीकरण
अगर यह सौदा तय समयसीमा यानी अक्टूबर तक पूरा होता है, तो यह किसी सरकारी बैंक के पहले बड़े निजीकरण सौदे के रूप में दर्ज होगा। इससे सरकार को अन्य PSU बैंकों में हिस्सेदारी घटाने की राह मिलेगी।
सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य बैंकिंग क्षेत्र में सरकारी नियंत्रण को सीमित करना है और यह सौदा इस दिशा में अहम साबित होगा।
शेयर बाजार में हलचल
26 जून को जब IDBI बैंक के रणनीतिक बिक्री की खबरें सामने आई थीं, तो बैंक के शेयरों में तेजी देखी गई थी। हालांकि, आज IDBI बैंक के शेयर 99.60 रुपये पर मामूली गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं।
विनिवेश से 50,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य
सरकार इस हिस्सेदारी बिक्री के जरिए करीब 50,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। यह राशि सरकार के वित्तीय घाटा कम करने और बुनियादी ढांचे में निवेश जैसे बड़े लक्ष्यों के लिए उपयोग की जाएगी।
