Chhattisgarh Tomar Brothers Case पर हाईकोर्ट की सख्ती, एसपी से पूछा– 7 FIR का आधार क्या, दो हफ्ते में दें जवाब
Chhattisgarh Tomar Brothers Case
Chhattisgarh Tomar Brothers Case: रायपुर के चर्चित सूदखोरी मामले में आरोपी तोमर बंधुओं की अग्रिम जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। अदालत ने रायपुर एसपी से तीखे सवाल पूछते हुए कहा कि आखिर किन परिस्थितियों और किस आधार पर आरोपियों के खिलाफ एक साथ 7 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गईं। हाईकोर्ट ने इस पर विस्तृत जवाब मांगा है और निर्देश दिया है कि एसपी व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करें।
कई थानों में दर्ज केस
गौरतलब है कि तेलीबांधा और पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र में सूदखोर वीरेंद्र तोमर और उसके भाई रोहित तोमर के खिलाफ उगाही और सूदखोरी से जुड़े मामले दर्ज किए गए थे। पुलिस की छापेमारी के दौरान तोमर बंधुओं के घर से जमीनों के दस्तावेज़ और चेक जब्त किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि दोनों भाई संगठित अपराध में शामिल हैं। इसके बाद पुलिस ने 7 अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर उनके खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी।
गिरफ्तारी से बचने की कोशिश
कार्रवाई शुरू होते ही वीरेंद्र और रोहित तोमर गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हो गए। पुलिस का कहना है कि रोहित ने अपनी पत्नी भावना के नाम पर एक दफ्तर खोला था, जहां से सूदखोरी का धंधा संचालित होता था। पिछले दो माह से पुलिस उनकी तलाश कर रही है। दोनों हिस्ट्रीशीटर भाइयों पर पुलिस ने इनाम भी घोषित किया है।
हाईकोर्ट में पेश की गई जमानत याचिका
गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों भाइयों ने वकील सजल गुप्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दायर की है। सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से यह दलील दी गई कि पुलिस उन पर दबाव बना रही है और दुर्भावनापूर्ण तरीके से संगठित अपराध के मामलों में फंसाया गया है। इससे पहले भी अदालत ने इस मामले में केस डायरी तलब की थी।
हाईकोर्ट ने अब रायपुर एसपी से स्पष्ट जवाब मांगा है कि किन परिस्थितियों में इतनी बड़ी संख्या में एफआईआर दर्ज की गईं। अदालत की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
