बच्चों को फिनायल मिला खाना परोसे जाने पर हाईकोर्ट की फटकार, चीफ सेक्रेटरी से मांगा जवाब

सुकमा: जिले के पाकेला स्थित पोटाकेबिन छात्रावास में बच्चों को फिनायल मिला भोजन परोसे जाने की गंभीर घटना पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने इस मामले को स्वतः संज्ञान में लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज कर सुनवाई की।

“यह साधारण लापरवाही नहीं, गंभीर चूक है” — चीफ जस्टिस

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने महाधिवक्ता से तीखे सवाल पूछते हुए नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “ये केवल लापरवाही नहीं, घोर प्रशासनिक चूक है। अगर बच्चों की जान चली जाती, तो स्थिति को संभालना मुश्किल हो जाता।” कोर्ट ने सख्त लहजे में पूछा कि आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है? मुख्य न्यायाधीश ने राज्य के मुख्य सचिव को शपथपत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया कि इस मामले की सतत निगरानी की जाए और समय-समय पर रिपोर्ट पेश की जाए।

क्या है मामला?

घटना सुकमा जिले के पोटाकेबिन छात्रावास की है, जहां 426 बच्चों को फिनायल मिला खाना परोसा गया। बच्चों ने खाने से उठती तेज दुर्गंध महसूस कर भोजन खाने से इंकार कर दिया, जिससे बड़ी अनहोनी टल गई। अगर बच्चे खाना खा लेते, तो यह एक बड़ी दुर्घटना में बदल सकता था। यह मामला मीडिया में आने के बाद प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना। INH NEWS और प्रमुख समाचार पत्रों द्वारा इसे प्रमुखता से उठाया गया, जिसके बाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे गंभीरता से लिया।

अदालत की सख्त चेतावनी

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकारी छात्रावासों में बच्चों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलना उनका अधिकार है। यदि ऐसी घटनाएं दोहराई गईं, तो कोर्ट कड़ा रुख अपनाएगा।

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