Hidma and Wife Encounter: मोस्ट वांटेड नक्सली हिडमा और पत्नी के शव गांव पहुंचा

सुकमा। Hidma and Wife Encounter: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। आंध्रप्रदेश बॉर्डर पर मंगलवार को हुई मुठभेड़ में मारे गए एक करोड़ रुपये के इनामी कुख्यात नक्सली कमांडर माड़वी हिडमा और उसकी पत्नी के शव उसके पैतृक गांव पूवर्ती पहुंचा दिया गया है। सुरक्षा कारणों से फिलहाल दोनों के शव सीआरपीएफ कैंप में रखे गए हैं। सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को भारी सुरक्षा घेरे में दोनों का अंतिम संस्कार ग्रामीण रीति-रिवाजों के साथ किया जाएगा। थोड़ी देर में शवों को गांव ले जाया जाएगा।

दो दिन पहले हुई मुठभेड़ में मारा गया हिडमा 

दरअसल, मंगलवार को आंध्रप्रदेश के अल्लूरी सीतारामराजू जिले के मारेदुमिल्ली जंगल में छत्तीसगढ़-आंध्रप्रदेश-तेलंगाना की सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच घंटों चली मुठभेड़ में हिड़मा को ग्रेहाउंड फोर्स और अन्य सुरक्षाबलों ने मार गिराया था। इस एनकाउंटर में हिडमा की पत्नी राजे उर्फ राजक्का सहित कुल 6 नक्सली मारे गए। आंध्रप्रदेश पुलिस की कस्टडी में रखे शवों की सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद बुधवार देर रात हिडमा और उसकी पत्नी के शव पूवर्ती गांव लाया गया। हिड़मा पर दो दशक में 26 से अधिक घातक हमलों का आरोप था, जिसमें 2013 का दरभा घाटी नरसंहार (27 लोगों की हत्या) और 2017 का सुकमा हमला (25 सीआरपीएफ जवान शहीद) शामिल हैं। वह पीएलजीए बटालियन नंबर-1 का प्रमुख और सीपीआई-माओवादी की केंद्रीय कमेटी का सदस्य था।

मां का दर्द: बार-बार सरेंडर की अपील न मानी

हिडमा की मां का हाल देखने लायक नहीं है। वह लगातार बेटे से सरेंडर करने की अपील करती रहीं, लेकिन हिडमा ने कभी नहीं माना। मां ने बताया कि हिडमा ने उन्हें कभी अपने साथ रखा, लेकिन बाद में वापस गांव छोड़ दिया। साल भर पहले पूवर्ती में सीआरपीएफ कैंप खुलने के बाद उसने गांव से दूरी बना ली थी। परिजनों को गांव के बाहर बुलाकर ही मिलता था।

6 साल बाद गांव लौटा था, फिर कभी नहीं आया

गांव वालों के अनुसार, हिडमा आखिरी बार 6 साल पहले पूवर्ती लौटा था। तब उसने सभी ग्रामीणों से मुलाकात की और कहा था कि फोर्स का दबाव बढ़ रहा है, इसलिए अब ज्यादा नहीं आ पाएगा। सब अच्छे से रहें, खेती-बाड़ी करें। इसके बाद उसने गांव का मुंह ताक ही नहीं। हिडमा का जन्म 1981 में इसी पूवर्ती गांव में हुआ था, जो नक्सली गतिविधियों का केंद्र माना जाता है।

यह एनकाउंटर नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों की लगातार चल रही कार्रवाई का हिस्सा है। हिडमा की मौत को बस्तर क्षेत्र में नक्सली आतंक पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है। उधर, इसी सीमावर्ती इलाके में बुधवार को एक और मुठभेड़ में 7 नक्सली मारे गए, जिसमें पोलित ब्यूरो सदस्य देवजी के मारे जाने की भी खबर है।

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