गुरमीत राम रहीम को फिर 40 दिनों की पैरोल: हरियाणा सरकार ने दी मंजूरी, 8 साल में 15वीं बार जेल से बाहर
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर जेल से बाहर आने की मंजूरी मिल गई है। हरियाणा सरकार ने बुधवार शाम उन्हें 40 दिनों की पैरोल दी है। रोहतक की सुनारिया जेल में बंद राम रहीम पैरोल के दौरान हरियाणा के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा परिसर में रहेंगे।
जेल से रिहाई की प्रक्रिया शुरू
जानकारी के अनुसार, पैरोल को कल शाम (3 जनवरी 2026) मंजूरी मिली। इसके बाद जेल प्रशासन ने उनकी रिहाई की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। पैरोल अवधि के दौरान राम रहीम को तय शर्तों का सख्ती से पालन करना होगा। उन्हें डेरा परिसर से बाहर किसी भी सार्वजनिक आयोजन, सभा या धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं है। प्रशासन उनकी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखेगा।
पिछले 8 साल में 15वीं बार बाहर
गुरमीत राम रहीम 2017 से रोहतक की सुनारिया जेल में बंद हैं। पिछले 8 वर्षों में यह उनकी 15वीं बार जेल से बाहर आने की घटना है। वर्ष 2025 में वे तीन बार जेल से बाहर आए थे — अप्रैल में 21 दिनों की फरलो और जनवरी में 30 दिनों की पैरोल मिली थी। पिछली पैरोल भी 40 दिनों की थी। नए वर्ष 2026 की शुरुआत के साथ ही वे फिर से पैरोल पर बाहर आ रहे हैं।
किन मामलों में सजा काट रहे हैं राम रहीम
राम रहीम पर 2017 में दो साध्वियों के साथ बलात्कार के दो मामलों में दोषी ठहराया गया था। इनमें उन्हें कुल 20 साल की सजा (उम्रकैद) सुनाई गई। इसके अलावा, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में भी उन्हें दोषी करार दिया गया है। इन सभी मामलों में वह सुनारिया जेल में सजा काट रहे हैं।
पैरोल पर उठते रहे विवाद
राम रहीम की बार-बार पैरोल और फरलो को लेकर राजनीतिक, सामाजिक और पीड़ित पक्षों से लगातार विरोध होता रहा है। कई बार इसे सजा में नरमी और विशेष छूट के रूप में देखा गया है। हरियाणा सरकार की ओर से दी गई इस पैरोल पर भी विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं।
प्रशासन की निगरानी में रहेगा डेरा
पैरोल अवधि के दौरान डेरा परिसर में उनकी गतिविधियों पर पुलिस और प्रशासन की विशेष नजर रहेगी। किसी भी उल्लंघन की स्थिति में पैरोल रद्द करने की कार्रवाई हो सकती है। राम रहीम की रिहाई से सिरसा और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है।
यह पैरोल 2026 के शुरू में राम रहीम की पहली बड़ी रिहाई है, जिससे राजनीतिक और सामाजिक बहस फिर तेज हो गई है।
