आसाराम को गुजरात हाईकोर्ट से बड़ी राहत: दुष्कर्म मामले में अस्थायी जमानत 7 जुलाई तक बढ़ी

गुजरात हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को 2013 में दर्ज दुष्कर्म मामले में बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उसकी अस्थायी जमानत को 7 जुलाई 2025 तक के लिए बढ़ा दिया है। अदालत ने यह फैसला चिकित्सा आधार और आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया को पूरा करने के मद्देनज़र दिया है।

तीन महीने की अस्थायी जमानत की अवधि थी समाप्त

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने पहले 28 मार्च को आसाराम को तीन महीने की अस्थायी जमानत दी थी, जो 30 जून को समाप्त हो रही थी। अब अदालत ने इस जमानत को और एक हफ्ते यानी 7 जुलाई तक के लिए बढ़ा दिया है। इस फैसले से आसाराम को कुछ और समय मिल गया है ताकि उसके वकील मामले से जुड़े दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश कर सकें।

वकील ने मांगा था दो दिन का वक्त

सुनवाई के दौरान आसाराम के वकील ने अदालत से सिर्फ दो दिन का अतिरिक्त समय मांगा था। उन्होंने कहा कि अगर सोमवार को यह मामला सूचीबद्ध होता है, तो वह सभी दस्तावेज रिकॉर्ड में रख सकेंगे और प्रतिवादी पक्ष भी उन्हें सत्यापित कर सकेगा। वकील ने यह भी कहा कि सोमवार को आसाराम को किसी भी हाल में आत्मसमर्पण करना होगा, इसलिए न्यायालय कृपया तब तक के लिए राहत दे।

अदालत ने दिया 7 जुलाई तक का समय

न्यायमूर्ति इलेश वोरा और संदीप भट्ट की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा, “वर्तमान याचिका के विशिष्ट तथ्यों और विशेष रूप से नालसा (राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण) से प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया को देखते हुए हम अस्थायी जमानत को 7 जुलाई तक बढ़ाने को तैयार हैं।”

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से मिल चुकी है राहत

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी आसाराम को चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत दी थी, जिसकी अवधि 31 मार्च को समाप्त हुई थी। इसके बाद गुजरात हाईकोर्ट ने 28 मार्च को तीन महीने की अस्थायी जमानत प्रदान की थी। उस समय हाईकोर्ट की खंडपीठ में मतभेद हुआ था, जिसके बाद मामला तीसरे न्यायाधीश को सौंपा गया। तीसरे जज ने भी आसाराम को तीन महीने की अस्थायी जमानत देने के पक्ष में फैसला सुनाया।

दुष्कर्म के दो मामलों में काट रहा है उम्रकैद

जनवरी 2023 में गांधीनगर की एक अदालत ने आसाराम को रेप के एक गंभीर मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। यह मामला सूरत निवासी एक महिला अनुयायी से जुड़ा था, जिसने आरोप लगाया था कि 2001 से 2006 के बीच उसके साथ कई बार दुष्कर्म हुआ।

इसके अलावा, आसाराम 2013 में राजस्थान के जोधपुर स्थित अपने आश्रम में एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के मामले में पहले से ही आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है।

कानूनी प्रक्रिया जारी, अंतिम फैसला अभी शेष

हालांकि, अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल अस्थायी जमानत है और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होते ही मामला फिर से विचाराधीन होगा। अब देखना होगा कि 7 जुलाई के बाद अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है। फिलहाल, चिकित्सा आधार और कानूनी दस्तावेजी प्रक्रियाओं के चलते आसाराम को थोड़ी और राहत मिल गई है।

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