गणेश चतुर्थी से दो माह पूर्व भव्य मूर्तियां बुक: बाल गणपति और लालबाग के राजा की मांग अधिक, बंगाल से पहुंचे कारीगर

रायपुर। राजधानी से लगे माना क्षेत्र में गणेश चतुर्थी की तैयारियां पूरे जोरों पर हैं। गणेश चतुर्थी 27 अगस्त को मनाई जाएगी और इस बार भक्तजन 5 फीट से लेकर 20 फीट तक की विशाल प्रतिमाओं के साथ त्योहार मनाएंगे। माना के दर्जनों मूर्तिकार प्रतिमा निर्माण में दिन-रात जुटे हैं, जिनमें से 70% से अधिक मूर्तियों की बुकिंग पहले ही हो चुकी है।

बुकिंग बंद, नए ऑर्डर लेने से इंकार:

कारीगरों ने बताया कि अब नई मूर्तियों के ऑर्डर लेना बंद कर दिया गया है, क्योंकि समय कम है और मिट्टी की मूर्तियों को सूखने में वक्त लगता है। गर्मियों में बनी आधी मूर्तियां पहले ही बिक चुकी हैं। कई समितियों ने तो पिछले वर्ष ही एडवांस बुकिंग कर ली थी। कुछ कलाकार जुलाई तक ही ऑर्डर स्वीकार करने की बात कर रहे हैं। इस बार मूर्तियों को खास रूप देने बंगाल से विशेषज्ञ कलाकार भी पहुंचे हैं। दिशा मूर्ति कला के सपन मंडल ने बताया कि इस बार बाल गणेश, राधा-कृष्ण, शिव-पार्वती, और साईं बाबा की झलक लिए प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। मूर्तियों का आकार देना लगभग पूरा हो चुका है, अब सफेद बेस पेंट के बाद प्राकृतिक रंगों से रंगाई की जाएगी।

लालबाग के राजा से बैलगाड़ी वाले गणेश तक:

समितियों की मांग पर इस बार लालबाग के राजा, रिद्धि-सिद्धि और शिवरूप गणेश जैसे विशिष्ट रूपों की प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। बैलगाड़ी, नाव, मूषक, हाथी, कमल, और शंख पर विराजित गणेश प्रतिमाएं राजधानी में खास आकर्षण का केंद्र बनेंगी। इस बार पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए मूर्तियों की रंगाई में प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जा रहा है ताकि विसर्जन के बाद तालाब और नदियों का जल प्रदूषित न हो।

छोटी मूर्तियों का निर्माण घटा, दामों में 5-8% की वृद्धि:

इस बार मूर्तियों के दाम पिछले वर्ष की तुलना में 5 से 8 प्रतिशत तक बढ़े हैं, लेकिन बुकिंग पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। मूर्ति निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्री – जैसे मिट्टी, लकड़ी, पैरा, बांस और सजावट का सामान – सभी की कीमतें बढ़ गई हैं। इससे मूर्तियों की लागत भी बढ़ी है। मूर्तिकारों ने बताया कि इस बार छोटी मूर्तियों का निर्माण सीमित संख्या में किया गया है, और ध्यान विशाल प्रतिमाओं पर केंद्रित है।

80 हजार से 1.80 लाख तक की मूर्तियां पहले ही बुक:

माना स्थित श्रुति मूर्तिकला के संचालक के अनुसार, 5 फीट से 12 फीट की करीब 40 प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं, जिनमें 80 हजार से 1.14 लाख रुपये तक की मूर्तियां पहले ही बिक चुकी हैं। मां काली मूर्तिकला के पवन बनर्जी ने बताया कि 15 फीट की मूर्ति की कीमत 1.05 लाख रुपये है, जबकि 7-8 फीट की प्रतिमाएं 80 हजार तक में बेची जा रही हैं। 20 फीट की सबसे बड़ी मूर्ति की कीमत 1.80 लाख रुपये है। मूर्तिकारों ने बताया कि समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए अब नए ऑर्डर नहीं लिए जा रहे हैं।

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