Farmers Protest: जमीन बचाने बैलगाड़ियों के साथ सड़कों पर उतरे किसान
Farmers Protest: हवाई अड्डा, एमआईडीसी और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध, हजारों किसान परिवार समेत धरने पर डटे
Farmers Protest: बैलगाड़ियों में राशन, पानी और परिवार के साथ हजारों किसान सड़क पर उतर आए हैं। गड़चिरोली में शुरू हुआ यह आंदोलन अब सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई बनता जा रहा है। आखिर क्यों किसान अपनी उपजाऊ जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं और कब तक चलेगा यह आंदोलन? पढ़िए पूरी रिपोर्ट।
Farmers Protest: जमीन बचाने बैलगाड़ियों के साथ सड़कों पर उतरे किसान, गड़चिरोली कलेक्ट्रेट पर बेमियादी आंदोलन शुरू
महाराष्ट्र के गड़चिरोली जिले में प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं, एमआईडीसी और हवाई अड्डे के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसानों ने बड़ा आंदोलन छेड़ दिया है। गड़चिरोली और चामोर्शी तहसील के हजारों किसान बुधवार को जिला मुख्यालय पहुंचे और कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर बेमियादी धरना शुरू कर दिया। आंदोलन की खास बात यह रही कि कई किसान अपने परिवारों और बैलगाड़ियों के साथ धरना स्थल पर पहुंचे, जिससे यह विरोध प्रदर्शन पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।
किसान संघर्ष कृति समिति के नेतृत्व में किसानों ने गांधी चौक से जिला कलेक्ट्रेट तक विशाल पैदल मार्च निकाला। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग भी आंदोलन में शामिल हुए। किसानों का कहना है कि उनकी उपजाऊ कृषि भूमि को औद्योगिक परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित किया जा रहा है, जबकि स्थानीय लोगों की सहमति और हितों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
आंदोलन के नेतृत्व कर रहे कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष महेंद्र ब्राह्मणवाड़े ने आरोप लगाया कि गड़चिरोली तहसील के हिरापुर, गुरुवाला, राखी और शिरपूरचक क्षेत्रों में प्रस्तावित हवाई अड्डे के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है। वहीं चामोर्शी तहसील के भेंडाला क्षेत्र के 14 गांवों ने अपनी जमीन देने से साफ इनकार कर दिया है, इसके बावजूद प्रशासन द्वारा अन्य गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
किसानों का कहना है कि सरकार और प्रशासन ने उनसे व्यापक चर्चा किए बिना ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उनका आरोप है कि उद्योगों और बड़े प्रोजेक्ट्स के नाम पर उनकी आजीविका और भविष्य को खतरे में डाला जा रहा है।
आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए कई किसान बैलगाड़ियों में खाद्यान्न, पीने का पानी और भोजन बनाने का सामान लेकर पहुंचे हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यह उनकी जमीन और भविष्य की लड़ाई है, इसलिए वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।

इस आंदोलन को तेली, कुणबी और कलार समाज के विभिन्न संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है। इसके अलावा कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के नेता और कार्यकर्ता भी आंदोलन स्थल पर पहुंचकर किसानों के समर्थन में खड़े दिखाई दिए।
किसानों की भारी भीड़ और आंदोलन की संभावित तीव्रता को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। कलेक्ट्रेट परिसर, मुख्य चौक और अन्य संवेदनशील इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
अब सभी की नजर सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि किसानों की मांगों पर जल्द कोई समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।
यह भी पढ़ें: SECL Kusmunda Coal Stock Fire : SECL के कोयला स्टॉक में भीषण आग, धधकते ढेर के बीच चल रहा डोजर
SECL Kusmunda Coal Stock Fire : SECL के कोयला स्टॉक में भीषण आग, धधकते ढेर के बीच चल रहा डोजर
