छत्तीसगढ़ में कर्मचारी-अधिकारियों की हड़ताल शुरू, इंद्रावती भवन समेत सभी सरकारी दफ्तरों में कामकाज ठप
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के बैनर तले 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आज से कामबंद-कलमबंद आंदोलन की शुरुआत हो गई है। हड़ताल का असर पहले ही दिन से व्यापक रूप में दिखाई दे रहा है। राजधानी रायपुर स्थित इंद्रावती भवन से लेकर प्रदेशभर के सरकारी कार्यालयों में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। स्थानीय निकायों, विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों में भी सन्नाटा पसरा हुआ है।
फेडरेशन का आह्वान, बेमुद्दत आंदोलन की चेतावनी
फेडरेशन के अध्यक्ष कमल वर्मा ने बुधवार को वीडियो संदेश जारी कर कर्मचारियों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने बताया कि यदि सरकार ने समय रहते मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं दिखाया तो 30 अक्टूबर 2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा भी की जा सकती है। कमल वर्मा ने कहा कि इस आंदोलन में प्रदेशभर के कर्मचारी संगठनों की एकजुटता देखने को मिल रही है और यह सिर्फ शुरुआत है।
इंद्रावती भवन में फिर से “तालाबंदी” जैसे हालात
इस हड़ताल के चलते इंद्रावती भवन में एक बार फिर से कामकाज पूरी तरह ठप है। कांग्रेस शासनकाल में भी ऐसे ही बेमुद्दत आंदोलन में 17 दिन तक दफ्तरों में काम बंद रहा था। अब एक बार फिर वैसा ही माहौल बनता नजर आ रहा है।
धरना स्थल पर नारेबाजी, भारी भीड़
राजधानी में आयोजित धरना स्थल पर बड़ी संख्या में कर्मचारी जुटे हुए हैं और अपनी मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी कर रहे हैं। सभी प्रमुख पदाधिकारी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।
ये हैं कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन की 11 प्रमुख मांगे:
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केंद्र सरकार के समान महंगाई भत्ता (DA) लागू किया जाए।
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DA के बकाया (एरियर्स) को GPF खाते में समायोजित किया जाए।
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सभी कर्मचारियों को चार स्तरीय समयमान वेतनमान दिया जाए।
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विभिन्न विभागों में वेतन विसंगति दूर कर पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
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प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा की गणना कर संपूर्ण सेवा लाभ प्रदान किया जाए।
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पंचायत सचिवों का शासकीयकरण किया जाए।
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सहायक शिक्षक और सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को तृतीय समयमान वेतनमान दिया जाए।
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नगरीय निकाय के कर्मचारियों को नियमित वेतन और समयबद्ध पदोन्नति मिले।
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अनुकंपा नियुक्ति में 10% सीलिंग को शिथिल किया जाए।
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प्रदेश में कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू की जाए।
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दैनिक, संविदा व अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने की नीति बने और
सभी विभागों में सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष की जाए।
