कर्मचारी चयन मंडल विधेयक पारित: लंबी बहस के बाद सत्र समाप्त; सीएम साय ने जताया आभार

छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र समाप्त

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छत्तीसगढ़ विधानसभा में शुक्रवार को राज्य की भर्ती व्यवस्था को नए ढांचे में लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सदन में छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल विधेयक 2026 प्रस्तुत किया। विधेयक पेश होते ही इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस तेज हो गई। विपक्ष ने साफ कहा कि मौजूदा स्वरूप में यह विधेयक सीधी भर्ती की प्रक्रिया में अपेक्षित एकरूपता नहीं ला पाएगा और इसे प्रभावी बनाने के लिए अभी कई संशोधनों की जरूरत है।

विपक्ष की ओर से यह भी कहा गया कि यदि भर्ती तंत्र को सचमुच पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है, तो सिर्फ नया बोर्ड या मंडल बना देने भर से काम नहीं चलेगा। कानून में ऐसे स्पष्ट प्रावधान होने चाहिए जो भर्ती प्रक्रिया, परीक्षा प्रणाली और चयन की पारदर्शिता को मजबूत करें। इसी मुद्दे पर सदन में लंबी चर्चा देखने को मिली।

CM साय बोले- भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए जरूरी है कानून

विधेयक पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य में भर्ती परीक्षाओं और चयन प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित, समयबद्ध और भरोसेमंद बनाने के लिए ऐसे कानून की जरूरत थी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भविष्य में भर्ती से जुड़ी अनियमितताओं और विवादों पर रोक लगाने के उद्देश्य से यह विधेयक लाया गया है।

सीएम ने कहा कि सरकार चाहती है कि युवाओं को भर्ती प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सीमा और भरोसेमंद व्यवस्था मिले। इसी वजह से परीक्षाओं का कैलेंडर जारी किया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी परीक्षाएं तय समय के भीतर आयोजित हों। उनका कहना था कि सरकार भर्ती प्रणाली को अनिश्चितता और विवादों से बाहर निकालकर एक सुव्यवस्थित ढांचे में लाना चाहती है।

दो साल में 32 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सदन में बताया कि राज्य सरकार पिछले दो वर्षों में 32 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। इसे सरकार की ओर से रोजगार सृजन और रिक्त पदों को भरने की बड़ी पहल के रूप में पेश किया गया।

उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में भर्ती प्रक्रिया को केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उसकी नियमित मॉनिटरिंग और तय कार्यक्रम के अनुसार क्रियान्वयन किया जाएगा। यही वजह है कि परीक्षा कैलेंडर जारी करने की बात पर सरकार विशेष जोर दे रही है।

कांग्रेस पर CM का हमला, PSC भर्ती घोटाले का उठाया मुद्दा

विधेयक पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब ऐसी स्थिति नहीं होगी जिसमें सोशल मीडिया पोस्ट या प्रचार में पांच लाख भर्ती दिखे और वास्तविकता में 20 हजार भर्ती ही हो। उन्होंने कहा कि सरकार आंकड़ों और घोषणाओं के बजाय वास्तविक भर्ती प्रक्रिया पर फोकस कर रही है।

सीएम साय ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में PSC भर्ती में भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के दौरान भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे और उसी तरह की घटनाएं दोबारा न हों, इसलिए मजबूत और संस्थागत व्यवस्था बनाना जरूरी है।

विपक्ष ने कहा- विधेयक में अभी और सुधार की जरूरत

हालांकि सत्ता पक्ष ने इसे भर्ती व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में अहम कदम बताया, लेकिन विपक्ष पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आया। विपक्ष का कहना था कि मौजूदा रूप में यह विधेयक भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण एकरूपता नहीं ला सकेगा। उनके मुताबिक, कानून में अब भी कई ऐसे बिंदु हैं जिन पर और विचार तथा संशोधन की जरूरत है।

सर्वसम्मति से पारित हुआ विधेयक

सदन में चर्चा और राजनीतिक नोकझोंक के बीच आखिरकार छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल विधेयक 2026 सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। विधेयक के पारित होने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सदन में इसे राज्य के युवाओं और भर्ती व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।

सदन में आभार, फिर विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

विधेयक पारित होने के बाद सदन में औपचारिक कार्यवाही भी आगे बढ़ी। अशासकीय संकल्पों को अगले सत्रों में प्रस्तुत किए जाने की बात कही गई। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का संदेश सभापति की ओर से पढ़ा गया। इसके साथ ही आसंदी की तरफ से सत्तापक्ष और प्रतिपक्ष, दोनों को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया गया।mमुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और नेता प्रतिपक्ष ने भी सदन के सभी सदस्यों के प्रति आभार जताया। इसके बाद विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।

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