बिजली बिल में दोहरा मापदंड: खैरागढ़ में सरकारी विभागों पर 20 करोड़ बकाया, जनता पर सख्ती
खैरागढ़। जिले में बिजली का मीटर भले ही सभी जगह समान गति से घूम रहा हो, लेकिन बिल चुकाने के नियम आम जनता और सरकारी विभागों के लिए अलग-अलग नजर आ रहे हैं। एक ओर जहां आम उपभोक्ताओं से समय पर भुगतान की सख्त अपेक्षा की जाती है और एक-दो महीने की देरी पर कनेक्शन काट दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर सरकारी विभाग करोड़ों का बकाया रखकर भी कार्रवाई से बचे हुए हैं।
आंकड़ों के मुताबिक खैरागढ़ संभाग के करीब 50 सरकारी विभागों पर 20 करोड़ रुपये से अधिक का बिजली बिल बकाया है। इसके मुकाबले क्षेत्र के लगभग 33 हजार निजी उपभोक्ताओं पर सिर्फ 4 करोड़ रुपये से अधिक की राशि लंबित है। अंतर साफ है—दबाव और कार्रवाई आम जनता पर, जबकि सरकारी विभागों पर नरमी।
विभागवार स्थिति देखें तो नगरीय निकायों पर सबसे ज्यादा करीब 8.33 करोड़ रुपये का बकाया है। वहीं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग पर लगभग 10.50 करोड़ रुपये का बिजली बिल लंबित है। इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, आदिम जाति कल्याण, वन और जल संसाधन विभागों पर भी बड़ी रकम बकाया है। कुल मिलाकर यह राशि 20 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी है।
चौंकाने वाली बात यह है कि जो सरकारी व्यवस्था आम नागरिकों को समय पर बिजली बिल भरने का संदेश देती है, वही खुद भुगतान में लगातार पिछड़ रही है। बिजली विभाग का कहना है कि संबंधित विभागों को लगातार नोटिस भेजे जा रहे हैं और संपर्क किया जा रहा है, लेकिन पिछले एक साल में बकाया राशि में कोई खास कमी नहीं आई है।
अब सवाल उठता है कि क्या नियम सिर्फ आम जनता के लिए ही हैं? जब एक आम उपभोक्ता का कनेक्शन काटा जा सकता है, तो करोड़ों रुपये का बकाया रखने वाले सरकारी विभागों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? यह स्थिति न सिर्फ बिजली विभाग बल्कि खैरागढ़ प्रशासन के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गई है, जहां समानता और न्याय सुनिश्चित करना जरूरी हो गया है।
