दो पूर्व प्रधानमंत्रियों की प्रतिमाओं की अलग-अलग तस्वीरें, अटल की चमक… इंदिरा की उपेक्षा से उठे सवाल
डोंगरगढ़। छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ शहर में इन दिनों दो पूर्व प्रधानमंत्रियों की प्रतिमाओं की स्थिति प्रशासनिक संवेदनशीलता और राजनीतिक प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। एक ओर भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की नई स्थापित प्रतिमा रोशनी, सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जगमगा रही है, वहीं दूसरी ओर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की प्रतिमा महीनों से क्षतिग्रस्त अवस्था में खड़ी होकर सिस्टम की उदासीनता को उजागर कर रही है। यह विपरीत स्थिति स्थानीय लोगों में असंतोष पैदा कर रही है और राष्ट्रीय नेताओं के सम्मान को राजनीतिक चश्मे से देखने की बहस छेड़ रही है।
25 दिसंबर को अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर उनकी प्रतिमा का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर पूरा प्रशासन सक्रिय नजर आया। कार्यक्रम स्थल को भव्य रूप से सजाया गया, सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और सीसीटीवी कैमरे लगाए गए। राजनीतिक स्तर पर भी विशेष तैयारियां देखी गईं, जिसमें स्थानीय नेता और अधिकारी शामिल हुए। इस आयोजन ने शहर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया, लेकिन इसी के साथ इंदिरा गांधी की प्रतिमा की दयनीय स्थिति ने विपरीत तस्वीर पेश की।
शहर के हृदय स्थल में स्थित हाई स्कूल परिसर में लगी इंदिरा गांधी की प्रतिमा को शरारती तत्वों द्वारा कई बार क्षतिग्रस्त किया गया है। महीनों से यह टूटी-फूटी हालत में खड़ी है, लेकिन न तो प्रशासन ने कोई स्थायी समाधान किया और न ही संबंधित राजनीतिक संगठनों की ओर से कोई ठोस विरोध या कार्रवाई सामने आई। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिले। न सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई और न ही समय पर मरम्मत कराई गई।
इस मुद्दे पर आमजन अब सवाल उठा रहे हैं कि यदि अटल जी की प्रतिमा के लिए इतनी तत्परता दिखाई जा सकती है, तो इंदिरा गांधी की प्रतिमा के मामले में चुप्पी क्यों साधी गई है? लोगों का मानना है कि यह राजनीतिक दुर्भावना का परिणाम है, जहां सत्ता की प्राथमिकताएं तय कर रही हैं कि किस नेता का सम्मान कैसे किया जाए। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “सवाल यह नहीं कि किसकी प्रतिमा बड़ी है, बल्कि यह है कि देश के दोनों पूर्व प्रधानमंत्रियों का सम्मान समान रूप से क्यों नहीं होना चाहिए?”
इस संबंध में थाना प्रभारी संतोष जायसवाल ने बताया कि शहर के प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना आवश्यक है और पुलिस नियमित गश्त कर रही है। हाई स्कूल के प्रभारी प्राचार्य जागेश्वर चंदेल ने कहा कि प्रतिमा के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी नगर पालिका को दे दी गई है। वहीं, नगर पालिका अधिकारी खिलेंद्र भोई ने मरम्मत कराने का भरोसा दिलाया है, हालांकि जमीनी स्तर पर अभी तक कोई बदलाव नजर नहीं आया है।
यह मामला अब केवल एक प्रतिमा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था की संवेदनहीनता और राजनीतिक पक्षपात का प्रतीक बन गया है। डोंगरगढ़ में एक ओर चमकती प्रतिमा सत्ता की सक्रियता दिखा रही है, तो दूसरी ओर टूटी प्रतिमा सिस्टम की लापरवाही की कहानी सुना रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई से ही राष्ट्रीय एकता और सम्मान की भावना मजबूत होगी।
