क्या सच में 30 करोड़ का धान चूहों ने खाया? जिम्मेदार कौन? विधानसभा में उठे तीखे सवाल
विधानसभा
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के बाद गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में करीब 30 करोड़ रुपये मूल्य का धान चूहों द्वारा खाए जाने का मामला विधानसभा में उठाया गया, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस विधायक रामकुमार यादव और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार से कई सवाल पूछे, जिनका संतोषजनक जवाब मंत्री नहीं दे पाए।
रिसाइक्लिंग की आशंका में रोका गया था धान उठाव
विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने बताया कि धान की रिसाइक्लिंग की आशंका के कारण 17 जनवरी से धान का उठाव रोक दिया गया था। इस वजह से कई उपार्जन केंद्रों में धान लंबे समय तक पड़ा रहा, जिससे खराब होने या चूहों द्वारा नुकसान की स्थिति बनी।
इस पर विधायक रामकुमार यादव ने कहा कि यदि सच में 30 करोड़ रुपये का धान चूहों ने खा लिया है, तो यह गंभीर लापरवाही है और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। मंत्री ने जवाब में कहा कि सक्ती जिले में 3.16 लाख क्विंटल धान का उठाव शेष है, जिसे मार्च से पहले उठा लिया जाएगा।
600 करोड़ के धान को लेकर भी उठे सवाल
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार को घेरते हुए कहा कि यदि रिसाइक्लिंग की आशंका के कारण धान उठाव रोक दिया गया, तो इसका मतलब है कि विभाग ने खुद मान लिया है कि ऐसी गड़बड़ी हो रही थी। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार के पास इस तरह की शिकायतें अन्य जिलों से भी आई हैं। हालांकि इस सवाल का खाद्य मंत्री दयालदास बघेल स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए।
डॉ. महंत ने यह भी कहा कि 17 जनवरी को धान खरीदी रोक दी गई, जबकि खरीदी 31 जनवरी तक चलनी थी। जिन किसानों के पास टोकन था, वे भी अपना धान नहीं बेच पाए। इससे करीब 600 करोड़ रुपये का धान नहीं बिक पाया, जिसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
दूसरे जिलों की आईडी से खरीदी पर भी सवाल
कोरबा जिले में अमानक चावल खरीदी के मामले को लेकर भी सदन में सवाल उठे। डॉ. चरणदास महंत ने पूछा कि बेमेतरा, जशपुर और बालोद जिलों की आईडी कोरबा कैसे पहुंच गई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या इन्हें हेलीकॉप्टर से भेजा गया था या बस से मंगाया गया था।
इस सवाल पर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। वहीं जब मंत्री ने बताया कि इस मामले में नान के एमडी को निलंबित किया गया है, तब डॉ. महंत ने पूछा कि रविवार के दिन यह कार्रवाई कितने बजे की गई। इस सवाल पर भी मंत्री चुप रहे।
अमानक चावल खरीदी पर भी उठा मामला
कांग्रेस विधायक ब्यास कश्यप ने कोरबा जिले में अमानक चावल खरीदी का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या दूसरे जिलों के अधिकारियों और कर्मचारियों की आईडी तथा ओटीपी का इस्तेमाल कर सब-स्टैंडर्ड चावल की खरीदी की गई है।
उन्होंने यह भी जानकारी मांगी कि कुल कितनी मात्रा में अमानक चावल खरीदा गया और उसकी अनुमानित कीमत कितनी है। साथ ही यह सवाल भी उठाया गया कि यदि गुणवत्ता जांच की गई थी तो फिर अमानक चावल कैसे स्वीकार कर लिया गया।
बारदाना खरीदी और कस्टम मिलिंग पर भी सवाल
सदन में धान भंडारण के लिए खरीदे गए बारदानों की संख्या, गुणवत्ता और उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए गए। विधायकों ने पूछा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में धान भंडारण के लिए कितने बारदाने खरीदे गए और किन संस्थानों से खरीदी की गई।
इसके अलावा कस्टम मिलिंग, धान परिवहन और राइस मिलर्स के भुगतान से जुड़े नियमों और भुगतान की स्थिति को लेकर भी सरकार से जानकारी मांगी गई। विधायकों ने पूछा कि कितने राइस मिलर्स को समय पर भुगतान हुआ और कितने मामलों में भुगतान अब भी लंबित है।
